
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली शराब घोटाला मामले में फैसला सुनाने वाले राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के.कविता समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करने का आदेश देते हुए सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ भी विभागीय जांच का आदेश दिया है. राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज जीतेंद्र सिंह ने कहा कि चार्जशीट में काफी विरोधाभास हैं. हजारों पेजों की चार्जशीट में जो तथ्य पेश किए गए हैं वे गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते. अभियोजन पक्ष पूरी तरह आरोप साबित करने में विफल रहा. कोई आपराधिक साजिश का साक्ष्य नहीं मिला.
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे. अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन जेल में रहे. अरविंद केजरीवाल 13 सितंबर 2024 को तब रिहा हुए जब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के मामले में जमानत दी.
जज ने सुनवाई के दौरान कई बार सीबीआई पर नाराजगी जताई औऱ सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जो दस्तेवज दिए वे चार्जशीट से मेल नहीं खाते हैं. बता दें कि कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर 12 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है. केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने कहा था कि केजरीवाल सरकारी काम कर रहे थे. इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि केजरीवाल ने किसी से कहा हो कि साउथ लॉबी से पैसे मांगे. हरिहरन ने कहा कि केजरीवाल का नाम पहले तीन चार्जशीट में नहीं था. उनका नाम चौथे पूरक चार्जशीट में लाया गया.
साउथ ग्रुप जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने पर नाराज़गी जताई
जज ने सीबीआई द्वारा साउथ ग्रुप जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा मेरे मन में ये भी चिंता थी कि साउथ ग्रुप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. ये सही नहीं है. अगर सीबीआई यही चार्जशीट चेन्नई में फाइल करती तो क्या साउथ ग्रुप लिखती? किसने ये शब्द बनाया?
इस पर सीबीआई ने कहा ये कई आरोपियों के लिए साझा शब्द था इस पर जज ने कहा कि अमेरिका में एक केस इसलिए खारिज कर दिया गया कि क्योंकि डोमिनिक समूह के लिए शब्द का इस्तेमाल किया गया था. मेरा मानना है कि साउथ ग्रुप जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था.
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने कहा था कि केजरीवाल सरकारी काम कर रहे थे। इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि केजरीवाल ने किसी से कहा हो कि साउथ लॉबी से पैसे मांगे। हरिहरन ने कहा कि केजरीवाल का नाम पहले तीन चार्जशीट में नहीं था। उनका नाम चौथे पूरक चार्जशीट में लाया गया.
फाइलें आपसे बात करने लगती हैं: जज की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल तब चर्चा का विषय बन गया जब जज जितेंद्र सिंह ने मामले की गहराई पर बात की. वकीलों और एएसजी (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल) का आभार व्यक्त करते हुए जज ने एक दार्शनिक लेकिन तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “जब आप किसी फाइल को बहुत अधिक गहराई से और बार-बार पढ़ते हैं, तो एक समय ऐसा आता है जब फाइलें आपसे बात करने लगती हैं.” जज का इशारा मामले की विसंगतियों और साक्ष्यों के अभाव की ओर था.
सीबीआई की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अदालत ने कार्यवाही के दौरान सीबीआई के वकीलों की ईमानदारी पर भी प्रश्नचिह्न लगाए. मुख्य विवाद ‘कन्फेशनल स्टेटमेंट’ (इकबालिया बयान) को लेकर हुआ. जब जज ने पूछा कि यह बयान अब तक जमा क्यों नहीं किया गया, तो सीबीआई ने इसे ‘सील कवर’ में होने की बात कही. इस पर जज जितेंद्र सिंह बिफर पड़े और कहा, “मुझे अभी तक उस बयान की कॉपी तक नहीं दी गई. मैं जांच एजेंसी के वकीलों से पूरी ईमानदारी की उम्मीद करता हूं.” अदालत ने इसे प्रक्रियात्मक खामी और पारदर्शिता की कमी माना.
ये है पूरा मामला
बता दें कि ईडी ने 21 मार्च 2024 को अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था. 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को 1 जून तक की अंतरिम जमानत दी थी जिसके बाद केजरीवाल ने 2 जून 2024 को सरेंडर किया था. केजरीवाल को 26 जून 2024 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. ईडी ने 10 मई 2024 को छठी पूरक चार्जशीट दाखिल किया था, जिसमें बीआरएस नेता के कविता, चनप्रीत सिंह, दामोदर शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद सिंह को आरोपी बनाया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर 2024 को केजरीवाल को सीबीआई के मामले में नियमित जमानत दी थी. उसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को ईडी के मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी.



