
संवाददाता
नाेएडा। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार को निधन हो गया। उनके परिवार ने जानकारी देते हुए बताया कि 94 वर्ष की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। मोहसिना किदवई का निधन नोएडा के मेट्रो अस्पताल में बुधवार की सुबह हुआ। उनके दामाद रजीउर रहमान किदवई ने बताया कि वह उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं।
उन्होंने बताया कि निजामुद्दीन के कब्रिस्तान में शाम करीब पांच बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। किदवई पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने राजीव गांधी की सरकार में महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला था। वे समय-समय पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों की सदस्य रह चुकी हैं।

भारतीय राजनीति की बड़ी क्षति
किदवई अतीत में कांग्रेस की कार्यकारी समिति और पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनके निधन से भारतीय राजनीति के एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का अंत हो गया। वे उन गिने-चुने नेताओं में थीं, जिन्होंने दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई।
मोहसिना किदवई का जन्म 1932 में उत्तर प्रदेश के एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन की ओर रुख किया और जल्द ही राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वे शुरू से ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ी रहीं और पार्टी की नीतियों तथा विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ से पहली बार जीत हासिल की—ठीक उस साल के बाद जब कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था, और इंदिरा गांधी के लिए नागौर (राजस्थान) और छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) की सीटें ही बची थीं। और संजय गांधी सहित उसका कोई भी उम्मीदवार जीत नहीं सका था।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष मोहसिना किदवई—जो अवध के एक रूढ़िवादी, संभ्रांत मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थीं—ने जीत दर्ज की। उनकी इस सफलता ने कांग्रेस में नई जान फूँक दी। देखते ही देखते, 1980 में एक बार फिर कांग्रेस न केवल सत्ता में वापस लौटी, बल्कि अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं में भी उसने बहुमत हासिल कर लिया।
मोहसिना किदवई ने वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में मेरठ लोकसभा सीट से जनता पार्टी के प्रत्याशी हरीश पाल को हराकर विजय प्राप्त की थी। वहीं, वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में लोकदल प्रत्याशी मंजूर अहमद को हराकर सांसद बनीं।
वर्ष 1985 में कांग्रेस के टिकट पर खरखौदा सीट से विधायक रहे राजेंद्र शर्मा का कहना है कि उनका निधन मेरठ के लिए अपूरणीय क्षति है। मेरठ से उनका विशेष लगाव था। वे पार्टी कार्यकर्ताओं की बेहद चिंता करती थीं। उनके सुख-दुख में हमेशा साथ रहती थीं। मेरठ से नौचंदी और संगम एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन में उनका विशेष योगदान रहा।
राजेंद्र शर्मा ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई को मेरठ से विशेष लगाव था। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की कैबिनेट में मंत्री रही। मेरठ को महानगर का दर्जा दिलाने में उनका विशेष योगदान रहा। मेरठ में हिंदू मुस्लिम एकता के लिए भी कार्य किया।

राजनीतिक जगत में शोक की लहर
उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा और विविधतापूर्ण रहा। वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा की सदस्य रहीं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने शहरी विकास, पर्यटन और आवास जैसे मंत्रालयों में मंत्री के रूप में काम किया और अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम नीतिगत फैसलों में योगदान दिया।
नके निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया। मोहसिना किदवई का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा, जिन्होंने समर्पण और सेवा के माध्यम से राजनीति को एक नई दिशा देने का प्रयास किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई के निधन पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया और उनके निवास स्थान पर पहुंचकर अंतिम प्रणाम किया।
- राहुल गांधी: उन्होंने मोहसिना किदवई के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें पार्टी की वफादार नेता और प्रेरणास्रोत बताया।
- सचिन पायलट: उन्होंने किदवई जी को विनम्र व्यक्तित्व की धनी बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
- कुमारी शैलजा: उन्होंने किदवई जी के निवास स्थान पर पहुँचकर उन्हें अंतिम प्रणाम किया और शोकाकुल परिजनों से भेंट कर संवेदनाएं व्यक्त कीं।
- भूपिंदर सिंह हुड्डा: उन्होंने भी इस अपूरणीय क्षति पर दुख प्रकट किया।
- इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी के विभिन्न नेताओं, कार्यकर्ताओं और उत्तर प्रदेश व केंद्र के कई नेताओं ने उन्हें याद किया.



