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चेक बाउंस मामला: अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ दर्ज मामले में फैसला सुरक्षित

राजपाल यादव आज सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित हुए.

संवाददाता

नई दिल्ली।  दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया. आज कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश की, लेकिन प्रयास असफल रहा. उसके बाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया.

दरअसल, गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौते के लिए बीच में सुनवाई बंद किया. जब सुनवाई दोबारा शुरु हुई तो मुरलीधर प्रोजेक्ट्स ने कहा कि पौने आठ करोड़ अभी बाकी हैं. उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष राजपाल यादव ने दो करोड़ रुपये जमा किए थे. तब कोर्ट ने कहा कि वो रकम एडजस्ट करना होगा.

मुरलीधर प्रोजेक्ट्स ने कहा कि सवा छह करोड़ में केस खत्म किया जाए, तब राजपाल के वकील ने कहा कि पौने छह करोड़ ही बाकी हैं. तब कोर्ट ने कहा कि छह करोड़ रुपये 18 दिनों में दीजिए. तब राजपाल के वकील ने कहा कि वे 17 करोड़ ले चुके हैं. मैं दोबारा कोर्ट जाने को तैयार हूं. हमें पांच बार और जेल भेज दीजिए. आखिरकार दोनों पक्षों में कोई समझौता नहीं हो सका. आज सुनवाई के दौरान राजपाल यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित हुए. इसके पहले 18 मार्च को राजपाल यादव की ओर से कहा गया कि उन्होंने मुरलीधर प्रोजेक्ट्स को सवा चार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था.

बता दें कि 16 फरवरी को कोर्ट ने राजपाल यादव को 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. 5 फरवरी को हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा था, जिसके बाद राजपाल ने जेल में सरेंडर कर दिया था. राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी. हालांकि, जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं, इसलिए उनकी सजा निलंबित की जाती है.

कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में दोषी करार देने के बाद राजपाल यादव पर 1 करोड़ 60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव की पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस जुर्माना लगाया था. दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में यह सजा सुनाई गई थी.

जानिए क्या है पूरा मामला

शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने अप्रैल 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ पूरी करने के लिए कंपनी से मदद मांगी थी. 30 मई 2010 में दोनों के बीच करार हुआ और उन्होंने राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ का लोन दे दिया. करार के मुताबिक, राजपाल को ब्याज सहित आठ करोड़ रुपए लौटाने थे, लेकिन वह पहली बार ये रकम नहीं लौटा सके. उसके बाद दोनों के बीच तीन बार करार का रिनिवल हुआ.

9 अगस्त 2012 को वह अंतिम करार में आरोपी राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपए लौट आने की सहमति भी थी. राजपाल यादव की कंपनी यह भी पैसा देने में नाकाम रही. अपने बचाव में राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधार नहीं लिया था. राजपाल यादव के मुताबिक, मुरली प्रोजेक्ट की कंपनी में पैसा निवेश किया था. लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया था.

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