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गाजियाबाद की पुरानी ‘लाहौर रेलवे लाइन’ पर कब्जे का खेल? निगम के निर्माण पर रेलवे ने मांगी रिपोर्ट

संवाददाता

गाजियाबाद। गाजियाबाद स्टेशन से पाकिस्तान के लाहौर जाने वाली बंद पड़ी रेलवे लाइन की भूमि पर हाल में नगर निगम द्वारा निर्माण करने का आरोप है।

वहीं पूर्व में सैकड़ों लोगों ने भी भूमि पर कब्जा कर मकान बना लिए हैं। रेलवे के अधिकारियों ने बंद पड़ी लाइन के दायरे में आ रही रेलवे की भूमि के संबंध में एसडीएम को पत्र लिखकर सत्यापन रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद रेलवे भूमि को कब्जामुक्त कराने को नोटिस जारी करेगा।

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कैला भट्ठा की गली में दिख रहे रेलवे ट्रैक के अवशेष

रेलवे के इतिहास से जुड़ी किताबों के मुताबिक गाजियाबाद में साल 1864 में रेल लाइन बिछाई गई थी। साल 1870-79 के बीच दिल्ली, गाजियाबाद, सहारनपुर, जगाधरी लाहौर व मुल्तान (अब पाकिस्तान में) तक 483 किमी लंबी लाइन का विस्तार हुआ था।

रेलवे की जमीन पर निर्माण का आरोप

गाजियाबाद से लाहौर के लिए लाइन मरकज मस्जिद के पास कैला भट्टा से होकर जाती थी। इस लाइन को गुलधर तक बंद कर दिया गया। हालांकि इससे आगे की लाइन का प्रयोग अभी भी हो रहा है। बंद रेलवे लाइन की पटरी वर्तमान में भूमि में दबी हुई है।

आरोप है कि पूर्व में रेलवे की भूमि पर मदरसा भी संचालित होता था। हाल में निगम ने कैला भट्टा स्थित मरकज मस्जिद के पास चारदीवारी कर पार्किंग बना दी और कुछ दुकानें भी बना दी हैं।

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कैला भट्ठा की गली में दिख रहे रेलवे ट्रैक के अवशेष

आरोप है कि निगम ने रेलवे की भूमि पर यह निर्माण किया है। मामले का संज्ञान लेकर रेलवे ने एसडीएम सदर को पत्र लिखकर भूमि की सत्यापन रिपोर्ट मांगी है। रेलवे का कहना है कि गाजियाबाद प्रशासन पत्र का जवाब नहीं देता है तो दोबारा से पत्र लिखा जाएगा।

बंटवारे के समय पाकिस्तान से आए थे हिंदू 

गाजियाबाद स्टेशन को अंग्रेजों के शासन में बना था। अंग्रेजों ने दो प्लेटफार्म के साथ इस स्टेशन का निर्माण किया था। बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से हिंदुओं को लेकर ट्रेन गाजियाबाद भी आई थी। यह ट्रेन इसी बंद ट्रेक से होकर आई थी।

देश के विभाजन के समय यहां कोयले का बड़ा गोदाम होता था। बंटवारे के समय मुस्लिम पाकिस्तान जाते थे और वहां से हिंदू भारत लौटते थे।

 

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