
संवाददाता
नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है. शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना है.
पीएम मोदी ने की आपातकालीन बैठक
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि राम नवमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई थी. इस बैठक में पश्चिम एशिया के संघर्ष और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण उत्पन्न हुई वैश्विक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई. वित्त मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री चाहते थे कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर भारत के आम उपभोक्ताओं की जेब पर न पड़े. उनके निर्देश पर वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय ने रात भर काम कर इस निर्णय को अमली जामा पहनाया.”
टैक्स में कटौती और नए प्रावधान
सरकार के ताजा फैसले के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, डीजल पर इसे घटाकर शून्य कर दिया गया है. इसके साथ ही, घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया गया है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क बढ़ाया गया है ताकि देश के भीतर विमान ईंधन की कोई कमी न हो.
तेल कंपनियों को मिलेगा सहारा
सीतारमण ने बताया कि इस कटौती का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को वित्तीय संकट से उबारना है. उन्होंने कहा, “कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों को नुकसान हो रहा था. इस निर्णय से उन्हें सहायता मिलेगी ताकि वे ऊंचे दामों पर तेल खरीद सकें और देश में आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो.” सरकार के इस कदम से बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की किल्लत की संभावना समाप्त हो जाएगी.
वैश्विक संकट का प्रभाव
वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार दबाव में है. दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से होकर गुजरता है, जिस पर वर्तमान में नाकेबंदी की स्थिति बनी हुई है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है. ऐसे में सरकार का यह हस्तक्षेप घरेलू अर्थव्यवस्था को महंगाई के झटके से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है.



