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दिल्ली के ग्रीन पार्क शमशान घाट में हरीश राणा का अंतिम संस्कार, बहन-भाई ने दी मुखाग्नि

परिवार रिश्तेदार सभी लोग इस वक्त गमगीन हैं. सबने भीगी आंखों से हरीश को अंतिम विदाई दी.

संवाददाता

नई दिल्ली । गाजियाबाद के हरीश राणा का ग्रीन पार्क स्थित शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया. पूरा परिवार इस वक्त गमगीन नजर आ रहा है. ब्रह्माकुमारी दीदी उनके परिवार के लोग और मित्रगण इस दौरान मौजूद रहे. हरीश को भाई और बहन ने मुखाग्नि दी.

हरीश राणा को सभी ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी, इस अवसर पर पिता के चेहरे पर साफ तौर पर बेटे को अंतिम विदाई देने का गम साफ नजर आ रहा था. चेहरे पर मास्क जरूर था लेकिन आंखें नम थी, मां की भी आंखें नम थी. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय भी हरीश राणा को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे थे.

सुबह एम्स दिल्ली से हरीश राणा का पार्थिव शरीर ग्रीन पार्क ग्राउंड श्मशान घाट लाया गया. जिसके बाद हिंदू रीतिरिवाज़ों से विधिविधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. मां और पिता के आंखें गमगीन है.

हिमाचल का परिवार
हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है. हरीश राणा के पिता अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव के रहने वाले हैं. अशोक राणा वर्ष 1989 में दिल्ली आए. उन्होंने मुंबई के एक नामी होटल में शेफ का काम किया. 2013 में बेटे हरीश के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दुर्घटना के बाद उन्होंने दिल्ली आकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली. चंडीगढ़ में हादसे के बाद से हरीश कोमा में चले गए.

परिवार-रिश्तेदार सब गमगीन

परिवार-रिश्तेदार सब गमगीन

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी पैसिव यूनेथेशिया की इजाजत
बता दें कि भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद एम्स-दिल्ली में मंगलवार को निधन हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी थी.

हरीश को आखिरी विदाई देने पहुंचे लोग

हरीश को आखिरी विदाई देने पहुंचे लोग

हरीश राणा को 14 मार्च को गाजियाबाद स्थित उनके घर से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की उपशामक देखभाल इकाई (पैलिएटिव केयर यूनिट) में स्थानांतरित किया गया था. वह 2013 से कोमा में थे.

परिवार ने बताया आंखें और हार्ट किया डोनेट
इसके बाद उनके परिवार ने एक बड़ा और प्रेरणादायक फैसला लिया. उन्होंने अंगदान के लिए सहमति दी, जिससे कई लोगों को नई जिंदगी मिल सकेगी. हरीश का दिल अब किसी और के शरीर में धड़क सकता है, जबकि उनकी आंखें किसी के जीवन में उजाला ला सकती हैं. इस फैसले की सोसायटी के लोगों ने सराहना की और इसे मानवता की मिसाल बताया. जानकारी के मुताबिक हरीश राणा के दो कॉर्निया और हार्ट वाल्व जैसे महत्वपूर्ण टिश्यू दान किए गए हैं. यह अंग एवं टिश्यू दान के क्षेत्र में एक बड़ा और प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है. हरीश का मंगलवार शाम 4 बजकर 10 मिनट पर निधन हुआ था.

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