
संवाददाता
गाजियाबाद/नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट से पैसिव यूथेनेशिया यानि इच्छामृत्यु की इजाजत पाए हरीश राणा का 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. हरीश राणा को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां पैसिव यूथेनेशिया की प्रकिया के तहत नियमानुसार उनके लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाए गए थे. 10 सदस्यीय डॉक्टरों का पैनल इस प्रोसेस में लगा था. हरीश को सम्मानजनक तरीके से मृत्यु मिले, इसकी पूरी कोशिश इस प्रकिया के तहत की गई थी. साथ ही उनके परिजनों की भी काउंसिलिंग की जा रही थी.
वे पिछले एक सप्ताह से बिना खाना और पानी के जीवित थे. यह प्रक्रिया छह दिनों से चल रही थी। इस दौरान उनके माता-पिता किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे थे.
बेटे के निधन से पहले मां की प्रार्थना
हरीश की मां अस्पताल के गलियारे में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रही थीं. बेटे के निधन से पहले मां ने भावुक होकर अपनी बात कही थी. उन्होंने कहा था कि मेरा बेटा सांस ले रहा है. उसकी धड़कन अभी भी चल रही है. मां ने यह भी कहा कि वह मुझे छोड़कर जा रहा है.



