
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की पूर्व आबकारी नीति को लेकर सार्वजनिक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट में बड़े खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में लिए गए कई संदिग्ध फैसलों के कारण दिल्ली सरकार को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ. समिति ने नीति निर्माण और क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं, नियमों की अनदेखी और संभावित पक्षपात के सबूत पाए हैं. PAC रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 की आबकारी नीति बनाते समय कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के लिए गए.
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज कर मनमाने फैसले लिए गए. लाइसेंस शुल्क समय पर जमा न करने वालों पर कार्रवाई में ढील दी गई, छूट दी गई और एयरपोर्ट जोन में अर्नेस्ट मनी डिपोजिट (EMD) भी बिना वजह वापस कर दिया गया. रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा इंडोस्प्रीट और खाओलगी रेस्टूरेंट प्राइवेट लिमिटेड के बीच पाए गए गहरे संबंधों का है. जांच में सामने आया कि खाओगली ने अपने कुल शराब स्टॉक का 45.26 प्रतिशत इंडोस्प्रीट से ही खरीदा. दोनों कंपनियों के बीच शेयरहोल्डिंग और डायरेक्टर स्तर पर भी संबंध पाए गए, जिससे थोक और खुदरा स्तर पर वर्टिकल इंटीग्रेशन के गंभीर संकेत मिले हैं.
PAC ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. 2021 नीति के टेंडर में 22 शिकायतें मिली थीं, जिनमें से 9 बोलीदाताओं को अयोग्य ठहराया गया, फिर भी 17 खुदरा जोन बिना उचित जांच के आवंटित कर दिए गए. कई फैसले कैबिनेट या उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना लिए गए. नीति लागू होने के महज एक साल के अंदर ही इसे वापस लेना पड़ा था. रिपोर्ट में पुरानी आबकारी नीति (2017-2021) की भी जमकर आलोचना की गई है. IMFL की कीमत निर्धारण में मनमानी, गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी, वैध टेस्ट रिपोर्ट न होने और ESCIMS प्रणाली को लागू करने में पूरी तरह विफलता बताई गई है.
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