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40 फर्जी कंपनियों ने लगाई 200 करोड़ की चपत, गाजियाबाद की 12 और दिल्ली की 28 फर्मों ने किया फर्जीवाड़ा

संवाददाता

गाजियाबाद। दिल्ली और गाजियाबाद की 40 फर्मों ने बीते एक वर्ष में कंपनियों को फर्जी इनवाइस बेचकर जीएसटी विभाग को 200 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। इसका खुलासा स्टेट जीएसटी की जांच में हुआ है। इसमें गाजियाबाद की 12 फर्मों के नाम सामने आए हैं। इन पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है। साथ ही बिल देने और फर्जी तरीके से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) क्लेम करने के नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 स्टेट जीएसटी जोन-2 गाजियाबाद संजीव भागिया ने बताया कि मामले में जांच चल रही है। फर्जी कंपनियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ ही मामले में पुलिस की मदद से फर्जीवाड़ा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

जरूरत के हिसाब से तैयार हो रहीं फर्जी फर्म

एसजीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर विशाल पुंडीर ने बताया कि हाल में हुई जांच में जिन 12 फर्मों के नाम सामने आए हैं, वे सिर्फ कागजों पर काम कर रही हैं। कंपनियों के नाम से सिर्फ इनवर्ड और आउटवर्ड सप्लाई की जानकारी पोर्टल पर दी गई है। असल में कोई कारोबार नहीं हुआ।

जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों ने अवैध रूप से अन्य कारोबारियों को इनवाइस उपलब्ध कराए। इससे गलत तरीके से आईटीसी क्लेम की गई। इस तरह कुल 121 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की जानकारी सामने आई है। इन फर्मों पर रिपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शहर के अलग-अलग थानों में ये मामले दर्ज कराए जाएंगे।

इन कंपनियों के नाम आए सामने

एसजीएसटी से मिली जानकारी के अनुसार, जांच में एएस इंटरप्राइजेज, ओम फर्नीचर, केएम इंटरप्राइजेज, एनके इंटरप्राइजेज, एआर इंजीनियरिंग वर्क्स, कृष्णा इंटरप्राइजेज, सार्थक इंटरप्राइजेज, मीना इंटरप्राइजेज, बालाजी इंटरप्राइजेज और धर्मेश इंटरप्राइजेज के नाम सामने आए हैं।

जांच के बाद दावा किया जा रहा है कि इन कंपनियों ने अलग-अलग तरीके से बिल जारी किए हैं। इसमें सीमेंट, आयरन, फर्नीचर समेत कई प्रकार का माल शामिल है। हालांकि, लेनदेन सिर्फ कागजों पर ही हुआ।

दिल्ली की फर्जी फर्मों ने गाजियाबाद के कारोबारियों के साथ किया खेल

जांच में दिल्ली की फर्जी कंपनियों का भी खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की कंपनियों ने गाजियाबाद की कंपनियों को आईटीसी ट्रांसफर की। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दिल्ली के विभिन्न पतों पर बनी 28 कंपनियों की मदद से यह खेल किया गया। इसमें विभाग को करीब 79 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा।

कमीशन पर होता है खेल

अधिकारियों के अनुसार, फर्जी इनवायस का खेल कमीशन पर हो रहा है। फर्जी इनवायस उपलब्ध कराने वाली फर्म कुछ दिन ही काम करती हैं। इसके एवज में दो से तीन फीसदी कमीशन लिया जाता है। साथ ही कई कंपनियों को एक से दो लोग ही संभालते हैं। इसमें फर्जीवाड़ा करने वालों की एक टीम जमीन पर रहकर काम करती है, जो कारोबारियों को लाभ दिलाने के नाम पर मास्टरमाइंड के संपर्क में लाती है।

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