
संवाददाता
नईं दिल्ली। एक लाश मिली.. चेहरा जला हुआ था. पास में एक आधारकार्ड मिला जिस पर लिखा था अर्चिता अरोड़ा. कहानी बताई गयी अंबाला की अर्चिता तलाकशुदा थी. दिल्ली में रहती थी, मेरठ के एक होटल में आना जाना था. पेमेन्ट को लेकर होटलवाले से विवाद हुआ और हत्या करके लाश फैंक दी गयी.
पुलिस ने चंद रोज पहले यही कहानी बताकर एक ब्लाइंड मर्डर का खुलासा किया. दावा किया गया कि अर्चिता अरोड़ा के परिजन उससे नही मिलना चाहते थे. डैडबॉडी लेने कोई नही आया. पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया. मगर इस खुलासे में पुलिस लाश की हकीकत छुपा गयी. एक राज जो गुडवर्क के चक्कर में हमेशा के लिए दफ्न कर दिया गया.
अब नया मोड आया है कहानी में. तुर्केमेनिस्तान की गुलनारा ने दावा किया है कि हत्या की गयी लड़की “उज्बेकिस्तान की मुहब्बत” है. मुहब्बत की मां ने उज्बेकिस्तान में भेजी गयी तस्वीरों के जरिये मुहब्बत की पहचान की है.
लड़की की कमर पर बने टेटू और डेडबॉडी के कानों की ईयररिंग से उसे पहचान कर उस पर अपनी बेटी होने का दावा किया है.
मुहब्बत के बारे में बताया गया कि वह रोजगार की तलाश में भारत आयी थी. दलाल ने मुहब्बत का भारत आने पर पासपोर्ट छीन लिया था. उसे सैक्स रैकेट के धंधे में धकेल दिया गया. अजीजा का कहना है कि उनके पास इतने पैसे नही कि वह भारत आकर कानूनी लड़ाई लड़ सके. उन्होने अपनी बेटी की अस्थियां और राख मांगी है.
मुहब्बत की हत्या होने की जानकारी चंडीगढ़ की एलीना ने मां को दी है. एलीना के पास मेरठ पुलिस के सब-इंस्पैक्टर सुमित कुमार का फोन आया था. पुलिस की जांच टीम में सुमित शामिल था. आधार कार्ड पर गलत नाम लिखा हुआ है जबकि फोटो मुहब्बत का है. पुलिस ने जानबूझकर मुहब्बत की असली पहचान छुपाई और केस वर्कआउट कर दिया.
जिस होटलवाले ने अपने साथियों के साथ मिलकर मुहब्बत की हत्या की, उसके चैट में भी अर्चिता का नाम मुहब्बत दर्ज है. होटल में उसके पहुंचने के बाद उसने लिखा मुहब्बत आ गयी है.
आरोपियों को भी मुहब्बत के बारे में जानकारी थी. वह यह भी अच्छे से जानते थे कि यह लड़की विदेशी है. पुलिस ने हाईप्रोफाइल मर्डर की सच्चाई जानबूझकर छुपाई जिससे मीडिया में कोई बबंडर खड़ा ना हो. जाहिर है एक विदेशी लड़की का मेरठ आना-जाना और उसकी हत्या होना कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है.
अजीजा ने जो फोटो उज्बेकिस्तान से भेजे है वह मुहब्बत के पासपोर्ट और आधार में लगे फोटो से मेल खाते है. मुहब्बत के शरीर पर टेटू थे इसलिए उसकी शिनाख्त खत्म करने के मकसद से हत्यारों ने उसे जगह-जगह तेजाब से जलाया.
ह्यूमन ट्रैफिकिंग को करीब से जानने वाले भी जानते है कि सैक्स रैकेट में काम करने वाली विदेशी लड़कियों के पास फर्जी आधारकार्ड होते है. यह नागरिकता का सबूत भी नही है. फिर पुलिस ने आखिर क्यों एक आधारकार्ड पर यकीन कर लिया.
सवाल यह भी है कि अगर पुलिस मृतका को अर्चिता अरोड़ा मानती थी तो दिल्ली या अंबाला में उसके परिचितों या परिवार से संपर्क क्यों नही किया गया. पुलिस के अधिकारी अब इस मामले पर चुप्पी साध गये है.
उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, खास करके महिलाओं की सुरक्षा का दावा किया जाता है. वह पुलिस जो बीते 5 बरसों से मिशन शक्ति जैसी योजना के जरिये महिलाओं को सशक्त करने का दावा करती हो, वहां एक विदेशी महिला की पहचान छुपाकर पूरे मामले पर परदा डाल दिया जाना, क्या साबित करता है.
जो सरकार 4 दिन पहले सिंगापुर, जापान में कानून-व्यवस्था की दुहाई देकर निवेश लाई हो, इस घटना के बाद पुलिस की खाकी मुहब्बत के खून से लाल है



