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यूजीसी कानून के विरोध में गाजियाबाद के महापंचायत, डॉ. उदिता त्यागी ने तोड़ा आमरण अनशन

संवाददाता

गाजियाबाद। डासना स्थित शिवशक्ति धाम में यूजीसी के नए कानून के विरोध में रविवार को 36 बिरादरियों की विशाल महापंचायत आयोजित की गई। इस अवसर पर पूर्व मिस एशिया इंटरनेशनल और महाकाली वाहिनी की समन्वयक डा. उदिता त्यागी ने छह दिनों से चल रहे अपने आमरण अनशन को पानी पीकर समाप्त किया, लेकिन आंदोलन जारी रखने का एलान किया।

डॉ. उदिता त्यागी ने चेतावनी दी कि यदि आवश्यकता पड़ी तो महाकाली वाहिनी रेल रोकेगी, सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगी और व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह अनशन भले ही समाप्त हो रहा हो, पर बच्चों के भविष्य की लड़ाई खत्म नहीं होगी।

किसी भी कीमत पर यूजीसी कानून को लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार यह समझ ले कि समाज अपने बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे देशभर के धर्मगुरुओं से मिलकर यूजीसी के नए कानून के खिलाफ समर्थन जुटाएंगी।

महापंचायत में यूजीसी कानून के विरोध में आगे की रणनीति और संघर्ष की रूपरेखा तैयार की गई। पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि यह कानून हिंदू समाज को बांटने की योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि तमाम दमन और अत्याचारों के बावजूद ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज आज भी सनातन धर्म की ढाल बनकर खड़े हैं।

महापंचायत में विभिन्न बिरादरियों और संगठनों से आए लोगों ने अपने विचार रखे और सरकार से यूजीसी के नए कानून को वापस लेने की मांग की। इस दौरान डा. बीपी त्यागी द्वारा चिकित्सा शिविर भी लगाया गया।

महापंचायत में अखिल भारतीय त्यागी भूमिहार ब्राह्मण महासंघ, त्यागी समाज, शिव सेना, करणी सेना, शहीद भगत सिंह सेना तथा महाकाली वाहिनी के पदाधिकारी व सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे। महापंचायत में लक्ष्मी चौहान, नीरज त्यागी, रविंद्र त्यागी, मांगे राम त्यागी, बीके शर्मा हनुमान, सेवा राम त्यागी, सूरज पाल सिंह अम्मू और अलंकार अग्निहोत्री सहित अनेक वक्ताओं ने विचार रखे।

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