
विशेष संवाददाता
वॉशिंगटन। भारत के साथ ट्रेड डील के बाद अब अमेरिका ने ऐसा कदम उठाया है जिसके बाद पाकिस्तान को मिर्ची लगना तय है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने भारत का एक नक्शा जारी किया है, जिसमें पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है। खास बात है कि इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) भी शामिल है। इस नक्शे को अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी होने के बाद पोस्ट किया गया है।
कश्मीर पर अमेरिका का बदला रुख?
कश्मीर के मुद्दे पर वॉशिंगटन का रुख रहा है कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है जिसे दोनों के बीच बातचीत के जरिए सुलझाया जाना है। सितम्बर 2023 में भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने अमेरिका रुख को दोहराते हुए कहा था कि कश्मीर का मु्द्दा एक द्विपक्षीय मामला है जिसे भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
हालांकि, पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर को लेकर कई ऐसे बयान दिए थे, जो वॉशिंगटन के पहले के रुख से उलट थे। ट्रंप ने सीधे तौर पर कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश कर दी थी। भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा था कि ‘मैं यह देखने की कोशिश करूंगा कि क्या एक हजार साल बाद कश्मीर के मुद्दे पर कोई समाधान निकाला जा सकता है।’
पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को झटका
अब ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस से की गई पोस्ट में दिखाए गए मैप ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया है। इसे पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ट्रंप की खुशामद में लगे हुए हैं। यहां तक कि शहबाज सरकार ने ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में भी शामिल होने का फैसला कर लिया, जिसका पाकिस्तान में ही विरोध हो रहा है।
कश्मीर पर भारत का क्या है कहना?
- भारत ने बार-बार कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा।
- भारत का कहना है कि पाकिस्तान से कश्मीर पर कोई भी बातचीत उसके कब्जे वाले कश्मीर (POK) की वापसी को लेकर ही होगी।
- भारतीय संसद में 22 फरवरी 1994 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और सदैव रहेगा।
- इसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर को देश के अन्य भागों से अलग करने के किसी भी प्रयास का सभी आवश्यक संसाधनों के माध्यम से विरोध किया जाएगा।
- इसी वजह से 22 फरवरी को हर साल जम्मू-कश्मीर संकल्प दिवस के रूप में याद किया जाता है।



