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अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन गिरफ्तार, करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में दिल्ली पुलिस ने कसा शिकंजा

संवाददाता

नई दिल्ली। अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बाद अब दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी मामले जवाद अहमद सिद्दीकी पर शिकंजा कसा है।

ताजा जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए, कथित धोखाधड़ी और गड़बड़ियों से जुड़े एक मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को अरेस्ट किया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। मामले में गिरफ्तारी के बाद, सिद्दीकी को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों दिल्ली की साकेत कोर्ट में जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर सुनवाई 13 फरवरी तक के लिए टाली गई थी। मामले में 16 जनवरी को ईडी की ओर से यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ की जमीन और बिल्डिंग को अटैच किया गया था। ये यूनिवर्सिटी लाल किला के पास हुए आतंकी धमाके के बाद खूब चर्चा में रही थी।

अधिकारियों ने बताया कि यह मामला कथित अनियमितताओं और जालसाजी से जुड़ा है। पूछताछ के दौरान और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। यूनिवर्सिटी तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आई थी जब यह पता चला था कि लाल किले ब्लास्ट केस में दोषी डॉ. उमर नबी उसी संस्थान में काम करता था। उसके दो साथी डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद भी यूनिवर्सिटी में काम करते पाए गए थे।

नवंबर 2024 में नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) द्वारा कथित तौर पर गलत एक्रेडिटेशन दावे को लेकर शो-कॉज नोटिस जारी करने के बाद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को ऑफलाइन कर दिया गया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि वह संस्थान की फंडिंग और उसके मेडिकल स्टाफ से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच करेगा।

एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “पहली FIR सेक्शन 12 के तहत उल्लंघन के लिए दर्ज की गई है। जबकि दूसरी FIR यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए कथित गलत एक्रेडिटेशन के दावों से संबंधित है।” NAAC के नोटिस में कहा गया था कि यूनिवर्सिटी न तो एक्रेडिटेड थी। और न ही उसने NAAC से एक्रेडिटेशन के लिए अप्लाई किया था। लेकिन उसने अपनी वेबसाइट पर गलत जानकारी दिखाई। 16 जनवरी को ED ने यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की जमीन और बिल्डिंग अटैच कर ली थी।

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