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इंजीनियर मौत केस में CBI की एंट्री, नोएडा अथॉरिटी से ले ली फाइलें, अब तक 4 गिरफ्तार

संवाददाता

नोएडा । नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में अब सीबीआई की एंट्री हो चुकी है. जांच एजेंसी स्पोर्ट्स सिटी आवंटन में MJ विजटाउन बिल्डर की भूमिका खंगालेगी. सीबीआई 21 जनवरी की रात रात नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़ी फाइल अपने साथ ले गई. स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट का एक हिस्सा MJ विज टाउन को बेचा गया था. इस मामले में नोएडा पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट में बिल्डर की भूमिका खंगालेगी CBI

नोएडा सेक्टर-150 में जिस गहरी खाई में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हुई, वह स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 का ए-3 प्लॉट है. प्लॉट नंबर-2 के उपविभाजन की मंजूरी प्राधिकरण अधिकारियों द्वारा दी गई थी. 27,185 वर्ग मीटर भूमि का भू-उपयोग लेआउट में कॉमर्शियल दर्शाया गया है. विजटाउन पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया है.

घटनास्थल का बारीकी से मुआयना

इस प्रकरण की गहन जांच के लिए फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच की और घटनास्थल को इंच बाय इंच नापा गया. फॉरेंसिक टीम ने उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरी थी. मौके पर सुरक्षा रेलिंग या ठोस बैरिकेडिंग की कमी को हादसे की एक बड़ी वजह माना जा रहा है.

ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजे गए MJ विजटाउन के डायरेक्टर

आरोपी बिल्डरों में से एक एमजे विजटाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में लापरवाही को लेकर जमकर फटकार भी लगाई. कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि जांच में ये भी साफ होना चाहिए कि लापरवाही किसकी है. नाली अगर टूटी है तो उसका जिम्मेदार कौन है. इतना ही नहीं बैरिकेड अगर नहीं लगा है तो उसका जिम्मेदार कौन है.

क्या है पूरा मामला?

गुरुग्राम में काम करने वाले युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार सेक्टर-150 में एक निर्माण स्थल के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई. कथित तौर पर करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाने के बाद उनकी मौत हो गई. इस दौरान पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें घने कोहरे के बीच उन्हें बचाने की कोशिश करती रहीं, जबकि उनके बेबस पिता राज कुमार मेहता अपनी आंखों के सामने इस त्रासदी को देखते रहे.

 

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