latest-newsएनसीआरदिल्ली

पुराने वाहनों को मिलेगी नई ज़िंदगी: दिल्ली की नई ईवी नीति में रेट्रोफिटमेंट से पुराने वाहनों के लिए खुलेगा बड़ा रास्ता

दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी व रेट्रोफिटमेंट तकनीक से वाहन मालिकों को फायदा और प्रदूषण कम करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.

संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध है. इससे लाखों वाहन मालिकों के सामने या तो वाहन स्क्रैप कराने या नई गाड़ी खरीदने की मजबूरी खड़ी हो जाती है. लेकिन अब दिल्ली सरकार की प्रस्तावित नई ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) पॉलिसी के जरिए इस समस्या का एक व्यावहारिक समाधान लेकर आ रही है.

इस नीति के तहत ओवरएज हो चुके पेट्रोल व डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराकर दोबारा सड़क पर चलाया जा सकेगा. वाहनों को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराने पर दिल्ली सरकार की सब्सिडी भी देने की योजना है. इसी विषय पर ईटीवी भारत से खास बातचीत में फॉक्स मोटर्स के सीईओ निखिल आनंद खुराना ने बताया कि रेट्रोफिटमेंट तकनीक पुराने वाहनों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. उन्होंने विस्तार से समझाया कि रेट्रोफिटमेंट का मतलब किसी भी मौजूदा पेट्रोल या डीजल वाहन में इलेक्ट्रिक ड्राइव ट्रेन को इंटीग्रेट करना है, जिससे वाहन प्योर इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड मोड में चल सके.

क्या है रेट्रोफिटमेंट तकनीक

निखिल खुराना ने बताया कि इस तकनीक में गाड़ी के मौजूदा इंजन व गियरबॉक्स के साथ एक इलेक्ट्रिक ड्राइव जोड़ी जाती है. इससे वाहन इलेक्ट्रिक मोड में चलने लगता है. उनकी कंपनी 50 से 100 किलोमीटर तक की मिनिमम इलेक्ट्रिक रेंज उपलब्ध करा रही है. इसके साथ ही ‘रेंज एक्सटेंडर मोड’ भी दिया जाता है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा संभव हो जाती है.

उन्होंने बताया कि यह तकनीक फॉक्स मोटर्स ने इसे 10–12 साल पहले ही विकसित कर लिया था. तकनीकी वैलिडेशन के साथ इसका प्लेटफॉर्म तैयार किया गया. इस सॉल्यूशन से माइलेज में 40 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी, रनिंग कॉस्ट में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी और प्रति किलोमीटर लगभग एक रुपये की इलेक्ट्रिक चार्जिंग लागत संभव है. इसके साथ ही जीरो एमिशन ड्राइव भी इसका एक बड़ा फायदा है.

खुद चार्ज होने वाली बैटरी की सुविधा

इस सिस्टम की एक खास बात ये भी है कि गाड़ी चलते-चलते भी बैटरी चार्ज हो सकती है. निखिल खुराना ने बताया कि पारंपरिक मैनुअल गियरबॉक्स में 50 से 70 प्रतिशत तक मैकेनिकल लॉसेस होते हैं. इन्हीं लॉसेस का उपयोग कर ट्विन रीजेनेरेटिव चार्जिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बैटरी भी चार्ज की जाती है. ये पेटेंटेड तकनीक 2012 की है. करीब 70 से 100 किलोमीटर की हाइब्रिड ड्राइविंग के बाद बैटरी पूरी तरह चार्ज हो जाती है, जिससे वाहन 50 से 100 किलोमीटर तक सेल्फ-चार्जिंग मोड में भी चल सकता है. उन्होंने बताया कि प्लग-इन चार्जिंग के जरिए भी 100 किलोमीटर तक की रेंज मिलती है. कमर्शियल वाहनों के लिए 300 से 400 किलोमीटर की बैटरी रेंज पर भी टेस्टिंग और डेवलपमेंट का काम चल रहा है.

क्या होगी वारंटी और बैटरी लाइफ

रेट्रोफिटमेंट करवाने वाले ग्राहकों के लिए कंपनी दो साल या 50 हजार किलोमीटर की स्टैंडर्ड वारंटी देगी. इसके अलावा एक्सटेंडेड वारंटी के तहत पांच साल या एक लाख किलोमीटर और पोस्ट एक्सटेंडेड वारंटी में आठ साल या दो लाख किलोमीटर तक का कवर उपलब्ध होगा. कंपनी का दावा है कि इस सॉल्यूशन को दो से पांच साल पुरानी गाड़ियों के साथ-साथ 10 साल पुरानी डीजल व 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों में भी लगाया जा सकता है. इसके साथ ही दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से फिटनेस सर्टिफिकेट को 10 साल तक बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं.

रेट्रोफिटिंग की लागत और समय

यदि खर्च की बात करें तो रेट्रोफिटमेंट की लागत लगभग दो से ढाई लाख रुपये और जीएसटी है. कमर्शियल वाहनों के लिए यह लागत तीन से चार लाख रुपये तक हो सकती है. दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ईवी पॉलिसी के तहत मिलने वाले करीब 50 हजार रुपये के इंसेंटिव से यह और सस्ती हो सकती है. सबसे बड़ी बात ये है कि पूरी प्रक्रिया में सिर्फ चार से छह घंटे का समय लगता है. कंपनी के रेट्रोफिटमेंट सेंटर वाहन को सुबह पिकअप कर शाम तक ईवी में कन्वर्ट कर घर पर डिलीवर कर देंगे.

जीएसटी को लेकर अभी असमंजस

फिलहाल रेट्रोफिटमेंट पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है जबकि नई ईवी पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है. निखिल खुराना का कहना है कि सरकार से यह मांग की जा रही है कि रेट्रोफिटमेंट में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों व तकनीक पर भी ईवी की तरह 5 प्रतिशत जीएसटी लागू हो, जिससे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

जानिए कितने लोगों को होगा फायदा

निखिल आनंद खुराना ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में करीब 50 से 70 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं. इनमें से 10 से 15 लाख वाहन एंड ऑफ लाइफ साइकिल में हैं. साथ ही करीब 25 लाख वाहन मौजूदा एमिशन मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. रेट्रोफिटमेंट तकनीक के जरिए बीएस-3 व बीएस-4 वाहनों को आने वाले बीएस-7 और बीएस-8 मानकों के अनुरूप बनाया जा सकता है, वह भी जीरो एमिशन ड्राइव के साथ.

कुल मिलाकर दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी व रेट्रोफिटमेंट तकनीक मिलकर न सिर्फ वाहन मालिकों को बड़ी राहत दे सकती है, बल्कि प्रदूषण कम करने व सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com