
संवाददाता
नई दिल्ली । अगले महीने दिल्ली में बीजेपी सरकार अपने गठन के एक साल पूरा करने जा रही है. ऐसे में रेखा गुप्ता सरकार अपने किए वादों को मद्देनजर सक्रिया नजर आ रही है. दरअसल, मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में वित्त व्यय समिति ने दक्षिण दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना को मंजूरी दी है. परियोजना के तहत, एमबी रोड पर साकेत जी-ब्लॉक से पुल प्रह्लादपुर तक 6-लेन का एकीकृत एलिवेटेड रोड और दो अंडरपास भी बनेंगे. इनके निर्माण से दक्षिण दिल्ली के लोगों को लंबे समय से जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी. यह परियोजना न केवल यातायात के दबाव को कम करेगी, बल्कि आवागमन का समय भी घटाएगी. परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना पर करीब 1471.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
दो पार्ट में बनेगा एकीकृत एलिवेटेड रोड
एमबी रोड पर बनेगा एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना का निर्माण दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) करेगा. यह परियोजना डीएमआरसी कॉरिडोर के अलाइनमेंट में विकसित की जाएगी, जिससे सड़क और मेट्रो, दोनों बुनियादी ढांचों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके. इस एकीकृत संरचना में डबल डेकर सिस्टम वाला 6-लेन एलिवेटेड फ्लाईओवर बनेगा, जिसमें ऊपर मेट्रो चलेगी और उसके नीचे एलिवेटेड कॉरिडोर होगा.
प्रस्ताव को केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की मंजूरी जरूरी
इस परियोजना में दो अंडरपास भी बनाए जाएंगे जो साकेत-जी ब्लॉक और बीआरटी कॉरिडोर पर बनेंगे. यह मॉडल न केवल कम जगह में अधिक क्षमता प्रदान करेगा, बल्कि साकेत जी-ब्लॉक, आंबेडकर नगर, खानपुर और संगम विहार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात की गति को दोगुना कर देगा. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने संगम विहार से मां आनंदमाई मार्ग तक करीब ढाई किलोमीटर लंबे छह लेन के एलिवेटेड रोड को भी सैद्धातिक मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय को भेजा जा रहा है. प्रस्तावित क्षेत्र तुगलकाबाद किला के अधीन आता है.
परियोजना से यातायात में बड़े सुधार का दावा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दावा किया कि इस परियोजना में निवेश से दक्षिण दिल्ली की यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा. एमबी रोड पर लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी, वाहनों की औसत गति बढ़ेगी और लाखों यात्रियों का समय बचेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास राजधानी को आधुनिक, सुगम और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.

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सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत लागू
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना केंद्र सरकार की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) योजना के तहत लागू की जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य एक ही छत के नीचे ऐसी सुविधाएं प्रदान करना है, जिन्हें व्यक्तिगत रूप से खरीदना छोटे उद्यमियों के लिए मुमकिन नहीं होता इन केंद्रों के माध्यम से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को साझा मंच प्रदान किया जाएगा, जहां वे बिना किसी भारी निवेश के आधुनिक मशीनों, टेस्टिंग लैब और ट्रेनिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे.
सीएफसी के माध्यम से श्रमिकों को कौशल, तकनीकी प्रशिक्षण
इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 60 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें प्रत्येक सेंटर पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे. उन्होंने कहा कि सीएफसी के माध्यम से श्रमिकों को कौशल, तकनीकी प्रशिक्षण और उत्पाद गुणवत्ता सुधार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी. इसके साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट और टिकाऊ तकनीक से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.

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