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अभी लंबा खिंचेगा बीएमसी मेयर का चुनाव

एकनाथ शिंदे कर रहे 'गेम', पर बेफिक्र हैं देवाभाऊ

संवाददाता

महाराष्ट्र की सियासत में इस समय नगर निगम स्तर पर सत्ता संतुलन को लेकर हलचल तेज है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विश्व आर्थिक मंच (WEF) में भाग लेने के लिए दावोस रवाना होने के चलते बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सत्ता साझेदारी और मेयर पद को लेकर बातचीत फिलहाल थम गई है. सूत्रों मानें तो यह प्रक्रिया जनवरी के अंत तक खिंच सकती है, क्योंकि मेयर पद के आरक्षण की श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की तारीख भी आने वाले दिनों में तय की जाएगी.

सूत्रों के अनुसार, 22 जनवरी को मेयर पद के लिए लॉटरी निकाले जाने की संभावना है, जिसमें यह तय होगा कि पद ओपन कैटेगरी, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा. कैटेगरी तय होते ही उसी दिन या अगले दिन अधिसूचना जारी की जाएगी. इसके बाद सात दिन का नोटिस अनिवार्य होने के कारण महापौर चुनाव 29 या 30 जनवरी को होने की संभावना है. अगर अधिसूचना 23 जनवरी को जारी हुई तो मतदान 30 या 31 जनवरी को कराया जा सकता है. इस बीच मुख्यमंत्री फडणवीस रविवार को दावोस के लिए रवाना हो गए और वे 24 जनवरी को लौटेंगे. इससे पहले उन्होंने कहा था कि वे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य महायुति नेता मिलकर मेयर पद पर फैसला करेंगे. यह बयान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत की उस टिप्पणी के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भगवान की इच्छा हुई तो शिवसेना का मेयर बनेगा. इस पर फडणवीस ने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता राउत ‘ऊपर वाले भगवान’ की बात कर रहे थे या उनकी, क्योंकि उन्हें भी ‘देवाभाऊ’ कहा जाता है.

BMC: किसको कितनी सीटें

भाजपा 89
शिवसेना (शिंदे) 29
शिवसेना (यूबीटी) 65
मनसे 6
कांग्रेस 24
AIMIM (ओवैसी) 8

महायुति का समीकरण

बीएमसी चुनाव में भाजपा ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 89 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं. दोनों मिलकर 118 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े 114 से आगे हैं. उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को तीन सीटें मिली हैं, जिनके भी महायुति का समर्थन करने की संभावना जताई जा रही है. दूसरी ओर विपक्षी खेमे में शिवसेना (यूबीटी) को 65, मनसे को छह और एनसीपी (शरद पवार) को एक सीट मिली है. कांग्रेस के 24, एआईएमआईएम के आठ और समाजवादी पार्टी के दो पार्षदों के साथ विपक्ष का कुल आंकड़ा 106 तक पहुंचता है, जो बहुमत से आठ कम है. हालांकि, गणित में महायुति मजबूत स्थिति में है, लेकिन मेयर पद को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उपमुख्यमंत्री शिंदे भाजपा के साथ महापौर पद साझा करने या रोटेशन के आधार पर देने की मांग कर रहे हैं. मुंबई में दशकों से शिवसेना का मेयर रहा है और इस परंपरा के टूटने को शिंदे अपने राजनीतिक भविष्य और बाल ठाकरे की विरासत पर दावे के लिहाज से नुकसानदेह मान रहे हैं. दूसरी ओर भाजपा भी चाहती है कि अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन के दम पर वह इस बार महापौर पद अपने खाते में डाले.

इसी राजनीतिक असमंजस के बीच ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्‍स’ एक बार फिर मुंबई में चर्चा का विषय बन गई है. चुनाव परिणामों के बाद शिंदे गुट के पार्षदों को एक पांच सितारा होटल में ठहराए जाने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. इसे विपक्ष की संभावित जोड़तोड़ से बचाव के साथ-साथ सहयोगी भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) ने तीखा हमला बोला है. पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि मुंबई को अब तक 23 मराठी महापौर देने वाली शिवसेना की परंपरा क्या आगे भी कायम रहेगी. संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे के बीच खुले टकराव का दावा करते हुए कहा गया कि असली राजनीति अब शुरू होगी. उद्धव ठाकरे ने भी कार्यकर्ताओं से कहा कि उनका सपना है कि मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) का महापौर बने और भगवान की इच्छा हुई तो यह सपना पूरा होगा.

अंबरनाथ में खींचतान

उधर, महायुति खेमे में भी सियासी खींचतान का असर राज्य के अन्य नगर निकायों पर दिखने लगा है. अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना और भाजपा समर्थित अंबरनाथ विकास आघाड़ी के बीच विवाद बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंच गया है, जिसके चलते स्थायी समिति और अन्य पैनलों के गठन की बैठक टालनी पड़ी है. दावोस यात्रा के कारण मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति और मेयर पद के आरक्षण की औपचारिक प्रक्रिया के चलते बीएमसी में सत्ता साझेदारी पर फैसला फिलहाल टल गया है. जनवरी के अंत तक यह स्पष्ट हो पाएगा कि मुंबई की राजनीति में अगला मेयर भाजपा से होगा या शिवसेना से. यह फैसला न केवल नगर निगम प्रशासन की दिशा तय करेगा, बल्कि महाराष्ट्र की व्यापक राजनीति पर भी असर डालेगा.

 

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