
संवाददाता
नई दिल्ली । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 3000-बेड वाला नाइट शेल्टर होम का निर्माण हो रहा है. ये शेल्टर होम दूर दराज से इलाज के लिए आने वाले लाखों मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए बनाया जा रहा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इसके निर्माण में वकीलों को भी योगदान देने की अपील की है. दरअसल, शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वे एम्स (AIIMS) में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने हेतु प्रस्तावित 3000-बेड वाले नाइट शेल्टर के निर्माण में योगदान दें. कड़कड़ाती ठंड या भीषण गर्मी में फुटपाथ पर रात गुजारने वाले परिजनों की पीड़ा को समझते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसा कदम उठाया है.
पूरा मामला समझने की जरूरत है. दरअसल, शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJ) देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने एक अनूठी पहल की. कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) और वहां मौजूद वरिष्ठ वकीलों से अपील की कि वे एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों के परिजनों के लिए प्रस्तावित 3000 बेड वाले नाइट शेल्टर (रैन बसेरा) के निर्माण में दिल खोलकर योगदान दें.
कानूनी आदेश या फिर…?
कोर्ट ने साफ किया कि यह कोई कानूनी आदेश नहीं है, बल्कि एक मानवीय अपील है. जजों का मानना है कि जो लोग दूर-दराज के गांवों और कस्बों से अपनी जमा-पूंजी लेकर इलाज के लिए दिल्ली आते हैं, उनके सिर पर छत होना बेहद जरूरी है.
हाईकोर्ट की इस अपील का असर तुरंत देखने को मिला. सुनवाई के दौरान मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा और DHCBA के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने तुरंत इस नेक काम के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई. इन दिग्गजों ने भरोसा दिलाया कि वे इस शेल्टर होम के निर्माण के लिए दान देंगे और अन्य वकीलों को भी प्रेरित करेंगे.
क्यों है इस शेल्टर की सख्त जरूरत?
एम्स में हर दिन हजारों की संख्या में मरीज आते हैं. अस्पताल में बेड तो मरीज को मिल जाता है, लेकिन उनके साथ आए परिजन अक्सर बेबस नजर आते हैं. होटलों का महंगा किराया उनकी पहुंच से बाहर होता है, जिसके चलते एम्स के आसपास के फुटपाथ, मेट्रो स्टेशन और बस स्टॉप रात में ‘ओपन एयर बेडरूम’ बन जाते हैं.
एम्स प्रशासन का क्या कहना है?
एम्स प्रशासन ने कहा कि इसकी वजह से शेल्टर इन तीमारदारों को न केवल सुरक्षित और सुलभ ठहराव देगा, बल्कि उन्हें मौसम की मार से भी बचाएगा. इससे अस्पताल परिसर में अनावश्यक भीड़ कम होगी और सफाई व सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर हो सकेगी.



