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TMC आईटी सेल इंचार्ज के घर-ऑफिस पर ED के छापे:कार्रवाई के बीच ममता फाइल उठाकर निकलीं; कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे

संवाददाता

नई दिल्ली । I-PAC यानी Indian Political Action Committee के कोलकाता दफ्तर पर गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तूफान आ गया है.छापे की सूचना मिलते ही CM ममता बनर्जी इसके एक प्रमुख पदाधिकारी प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं. उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला है. ममता ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके IT सेल ऑफिस पर दुर्भावनावश ED ने छापा मारा है. तमाम जरूरी डाटा से भरी हार्ड डिस्क भी अफसरों ने कब्जे में ले ली है.

आइए इसी बहाने जानते हैं कि क्या है I-PAC? कैसे काम करती है यह संस्था? किस-किस राजनीतिक दल के लिए कैम्पेन चलाए? प्रशांत किशोर का इस संगठन से क्या रिश्ता है? कौन-कौन लोग काम कर रहे हैं? जानें इन सवालों के जवाब.

क्या है I-PAC?

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी भारत में चुनावी रणनीति और राजनीतिक संचार क्षेत्र की सबसे चर्चित पॉलिटिकल कंसल्टिंग संस्थाओं में से एक है. आसान शब्दों में कहें तो यह किसी राजनीतिक दल या नेता के लिए चुनावी कैंपेन मशीन की तरह काम करती है. डेटा, रिसर्च, ग्राउंड-वर्क, मीडिया-मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी के सहारे चुनावी रणनीति बनाना और उसे लागू कराना इसका मुख्य काम है.

I-PAC खुद को क्रॉस-पार्टी यानी अलग-अलग दलों के साथ काम करने वाला संगठन भी बताती है. इसकी शुरुआत साल 2013 में Citizens for Accountable Governance (CAG) के रूप में बताई जाती है, जो बाद में I-PAC के नाम से जाना गया. जन सुराज के संस्थापक, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इसके संस्थापकों में रहे हैं.

ED की कार्रवाई क्यों?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छापे की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस से जुड़ी थी और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे कोल स्कैम से जुड़े पुराने मामले की कड़ी के रूप में भी देखा गया. अभी इस मामले में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में यह ध्यान रखना जरूरी है कि तलाशी या जांच का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं होता. जांच एजेंसी किस निष्कर्ष पर पहुंचती है, यह बाद की कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक दस्तावेजों पर निर्भर करता है.

I-PAC कैसे काम करती है?

I-PAC का कामकाज आम तौर पर चार बड़े स्तंभों पर टिका हुआ माना जाता है.

ग्राउंड नेटवर्क और फील्ड ऑपरेशन: बूथ, वार्ड, ग्राम पंचायत स्तर तक टीमों की तैनाती, स्थानीय मुद्दों की पहचान, जनसंपर्क अभियान, कार्यक्रम, रैली, आउटरीच की योजना और पार्टी कैडर के साथ तालमेल.
रिसर्च और इनसाइट्स: सर्वे, फोकस-ग्रुप, डोर-टू-डोर फीड-बैक, स्थानीय सोशल-मैपिंग, विरोधी दलों की ताकत-कमजोरी का आकलन, ताकि डेटा-आधारित संदेश और एजेंडा बन सके.
डेटा, टेक्नोलॉजी और वॉर-रूम: चुनावी वॉर-रूम का संचालन, डैशबोर्ड, ट्रैकिंग सिस्टम, माइक्रो-टार्गेटिंग, बूथ-स्तरीय लक्ष्यों की निगरानी, डिजिटल टूल्स, ऐप्स और समन्वय.
डिजिटल, मीडिया और कम्युनिकेशन: सोशल मीडिया कंटेंट, वीडियो, डिज़ाइन, भाषण, स्क्रिप्ट, प्रेस नैरेटिव, और ऑनलाइन-ऑफलाइन संदेश का एकीकरण—ताकि ब्रांड-इमेज और इलेक्शन नैरेटिव नियंत्रित रहे.

ममता ने केंद्र पर साधा निशाना

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शुरुआत कैसे हुई और प्रशांत किशोर का क्या रोल रहा?
I-PAC की वेबसाइट के मुताबिक इस संगठन की शुरूआत साल 2013 में CAG के रूप में शुरू हुई थी. बाद में इसे I-PAC के नाम से जाना-पहचाना गया. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का नाम लंबे समय तक I-PAC की पहचान के साथ जुड़ा रहा.

मीडिया विश्लेषणों में उन्हें आधुनिक, डेटा-ड्रिवन चुनाव प्रबंधन को बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाने वाला चेहरा माना जाता है. बाद में जब पीके ने खुद चुनाव में उतरने का फैसला किया तो वे इस संगठन से अलग हो गए. संभव है कि वे कागज में अलग हुए हों और रणनीतिक रूप से टीम की मदद करते हों. जानकार मानते हैं कि I-PAC का ऑपरेशनल नियंत्रण किसी न किसी रूप में उनके और उनकी तैयार की हुई टीम के पास है.

I-PAC किसके नेतृत्व में है?

I-PAC निजी संगठन है. प्रतीक जैन को I-PAC का हेड बताया जाता है, जिनके कोलकाता आवास पर ईडी की छापेमारी भी हुई है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें सह-संस्थापक / निदेशक के रूप में भी संदर्भित किया गया है. दो अन्य निदेशकों के नाम भी वेबसाइट पर दर्ज हैं, इनमें ऋषि राज सिंह और विनेश चंदेल शामिल हैं. ऐसे में घोषित तौर पर कुल तीन निदेशक ऑफिशियल वेबसाइट पर दर्ज हैं. इस संगठन की स्थापना प्रशांत किशोर ने की थी.

I-PAC ने किन-किन दलों, नेताओं के लिए कौन से कैंपेन चलाए?

I-PAC की वेबसाइट पर राज्यों के हिसाब से कई प्रमुख अभियानों की सूची मिलती है. उदाहरण के तौर पर नीतीश के सात निश्चय साल 2015 में चला. साल 2017 में पंजाब में कैप्टेन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में जब कांग्रेस मैदान में थी तब इस संगठन ने-कैप्टेन दे 9 नुक्ते अभियान को हवा दी. इसी साल यूपी किसान यात्रा मुहिम चली तो साल 2019 में आंध्र प्रदेश में वाई एस जगन मोहन रेड्डी से जुड़ा कैम्पेन Jaganannas Navratnalu खूब पाॅपुलर हुआ और रेड्डी सरकार में आए.

इसी संगठन ने साल 2019 में ही महाराष्ट्र में शिव सेना वचन्नामा (Shiv Sena Vachannama) चलाया तो साल 2020 में केजरीवाल की 10 गारंटी और साल 2025 में केजरीवाल की 15 गारंटी भी शुरू किया. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस केलिए इसी संगठन ने साल 2021 तथा 2024 में भी कैम्पेन किये. साल 2021 में ही संगठन ने तमिलनाडु में डीएमके और पार्टी नेता एमके स्टालिन के लिए भी कैम्पेन किया. संगठन की वेबसाइट पर दर्ज यह सूची यह दिखाती है कि I-PAC ने अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों के साथ काम किया है.

I-PAC की स्ट्रेंथ कितनी है?

I-PAC अपनी वेबसाइट कई स्तरों पर नेटवर्क का दावा करती है. इसके मुताबिक वर्तमान में 350 कॉलेज, 280 से ज्यादा संगठन, 82 हजार से ज्यादा यूथ, 11 सौ करीबी समूह तथा चार सौ से ज्यादा सदस्य इस संगठन से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं. व्यावहारिक रूप से कहा जा सकता है कि चुनावी समय में अलग-अलग राज्यों में इस संगठन के पास वर्क फोर्स ज्यादा होती है. तभी ये प्रोफेशनल टीम की तरह काम का प्रबंधन कर पाते हैं. इनमें मैनेजर्स, रिसर्चर, डेटा/टेक, कंटेंट/डिजिटल की समझ रखने वालों की संख्या ठीक-ठाक हो सकती है. चुनाव के दौरान स्केल होने वाला फील्ड नेटवर्क, असोसिएट्स की संख्या स्वाभाविक रूप से अचानक बढ़ जाती है.

I-PAC टीम को कितनी सैलरी देती हैं?

I-PAC की वेतन संरचना भूमिका और अनुभव के साथ बदलती है. इसकी वेबसाइट पर वेतन का कोई आंकड़ा नहीं दिखाई दिया लेकिन माना जाता है कि ऐसे कार्य के लिए समुचित वेतन-भत्ते दिए जाते हैं. क्योंकि यह काम रोज का नहीं है. संगठन के पास काम आएगा तो वह लोगों हायर करेगा, ऐसे में प्रोफेशनल्स जिन्हें पता है कि अमुक काम कुछ महीनों या एक-दो साल के लिए ही है तो वे अपनी पूरी कीमत वसूलते हैं. कैंपेन की प्रकृति के कारण काम के घंटे और लोकेशन-ट्रांसफर जैसी मांगें भी अधिक हो सकती हैं. यह इस सेक्टर की सामान्य विशेषता है.

कौन-कौन लोग काम करते हैं?

I-PAC में आम तौर पर युवा प्रोफेशनल्स, रिसर्च, पब्लिक पॉलिसी इंटरेस्ट वाले लोग, डेटा/टेक बैकग्राउंड वाले, डिजिटल क्रिएटर्स, और फील्ड मैनेजमेंट प्रोफाइल्स शामिल रहते हैं. भूमिकाएं मोटे तौर पर कैम्पेन, फील्ड ऑपरेशन, शोध, डाटा, टेक, डिजिटल मीडिया और सपोर्ट स्टाफ की होती है. इसी के साथ एचआर, एडमिन, फाइनेंस, लीगल विंग में भी कुछ लोगों की तैनाती है, जो लगभग हरदम उपलब्ध हैं.

 

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