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साल बदला, सरकार बदली, पर नहीं बदली यमुना की तस्वीर

मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि दशकों की गंदगी साफ करने में उनकी सरकार को कम से कम 3 साल का समय लगेगा.

संवाददाता

नई दिल्ली। जैसे-जैसे 2025 का कैलेंडर अपने अंतिम पन्नों की ओर बढ़ रहा है, दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी एक बार फिर अपनी बेबसी पर आंसू बहा रही है. मानसून की बारिश ने कुछ समय के लिए उम्मीद जगाई थी, लेकिन साल खत्म होते-होते यमुना फिर से उन्हीं काले नालों और जहरीले झाग की गिरफ्त में है. करोड़ों खर्च हुए, सत्ता बदल गई, लेकिन नदी की नियति नहीं बदली.

DPCC और CPCB की 2025 की ताजा रिपोर्ट्स ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है. आंकड़ों के मुताबिक, यमुना अब केवल पानी का बहाव नहीं, बल्कि कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गई है.


ये है स्थिति

* शून्य ऑक्सीजन (DO): आईटीओ और आईएसबीटी जैसे इलाकों में ऑक्सीजन लेवल ‘जीरो’ दर्ज किया गया है. इसका मतलब है कि यहां जलीय जीवन पूरी तरह खत्म हो चुका है.

* प्रदूषण का मीटर: नालों में BOD का स्तर 220 mg/l तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित मानक (30 mg/l) से 7 गुना ज्यादा है.

* सीवेज का बोझ: दिल्ली रोजाना 350 करोड़ लीटर सीवेज पैदा करती है, जिसका बड़ा हिस्सा बिना साफ हुए सीधे नदी में गिर रहा है.

यमुना दिल्ली के पल्ला गांव में जब प्रवेश करती है, तो वह जीवित और निर्मल दिखती है, लेकिन वजीराबाद बैराज के बाद यमुना की हालत बिगड़ने लगती है. 27 बड़े नालों का ज़हर इसमें समाने लगता है. साहिबाबाद, इंद्रपुरी और सोनिया विहार जैसे नाले इस नदी की सेहत के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक इन नालों की ‘टैपिंग’ शत-प्रतिशत नहीं होगी, यमुना कभी साफ नहीं हो पाएगी.

सत्ता परिवर्तन और 3 साल की ‘डेडलाइन’

2025 में दिल्ली की सत्ता भाजपा के हाथों में आई. नई सरकार ने यमुना सफाई को ‘मिशन मोड’ पर लेने का दावा किया है. मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि दशकों की गंदगी साफ करने में उनकी सरकार को कम से कम 3 साल का समय लगेगा.

सरकार का नया एक्शन प्लान:

* यमुना में फेरी बोट चलाने की योजना.

* अत्याधुनिक मशीनों से सफाई का काम शुरू.

* साबरमती की तर्ज पर ‘यमुना रिवर फ्रंट’ का निर्माण.

हालांकि, जानकारों का कहना है कि योजनाएं आकर्षक हैं, लेकिन जमीन पर STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की कछुआ गति अभी भी सबसे बड़ी बाधा है. पिछले 10 वर्षों तक दिल्ली की कमान संभालने वाली ‘आप’ सरकार ने भी हर साल यमुना को साफ करने का वादा किया, जिसे बाद में खुद अरविंद केजरीवाल ने विफलता के रूप में स्वीकार किया. 2025 के विधानसभा चुनाव में भी यमुना एक बड़ा मुद्दा रही. आज भाजपा सरकार भी उसी वादे के साथ मैदान में है. सवाल यही है कि क्या 2028 तक यमुना सचमुच ‘आचमन’ के लायक बन पाएगी या यह भी एक चुनावी जुमला ही साबित होगा?
समाधान क्या है?

CPCB बोर्ड मेंबर डॉ. अनिल कुमार गुप्ता के अनुसार, केवल नदी की सतह से कचरा हटाना समाधान नहीं है. जब तक हर एक नाले का पानी 100% ट्रीट होकर नदी में नहीं गिरेगा, तब तक यमुना का इकोसिस्टम वापस नहीं लौटेगा. इसके लिए तकनीकी सुधार और जन-भागीदारी दोनों अनिवार्य हैं.

नालों से ही बिगड़ रही है यमुना की सेहत

DPCC की जुलाई 2025 की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में यमुना में कुल 27 प्रमुख नाले गिरते हैं. इनमें से 22 नालों में नियमित प्रवाह पाया गया, जबकि चार नालों में फ्लो नहीं था. मोलरबंद नाले को टैप किया जा चुका है, हालांकि टैपिंग के बावजूद बाकी नालों से आ रहा प्रदूषित व गंदा पानी नदी की हालत को लगातार बिगाड़ रहा है.

विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली में हर दिन लगभग 350 करोड़ लीटर सीवेज उत्पन्न होता है, जिसका बड़ा हिस्सा या तो बिना ट्रीटमेंट या अधूरे ट्रीटमेंट के यमुना में चला जाता है. यही वजह है कि नदी के भीतर झाग, बदबू व ऑक्सीजन की कमी आम हो गई है.

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