
राजनीतिक लड़ाई के लिए ईडी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली । भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों के खिलाफ सर्वाधिक सक्रिय रहने वाली जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) साल 2025 में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही। मनी लॉन्ड्रिंग, विदेशी मुद्रा उल्लंघन के अलावा भ्रष्टाचार जैसे अपराध करने वालों को काल कही जाने वाली ये एजेंसी इस साल भी विपक्षी दलों का सबसे ज्यादा निशानी बनी। एक तरफ जहां ईडी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा ट्रोल हुई तो वहीं अपनी कार्यप्रणाली को लेकर अदालती फटकार से भी जूझती नजर आई।
जनवरी 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व विधायक सुरेंदर पंवार के मामले में ईडी के आचरण को “अमानवीय” बताया। उन्हें 15 घंटे तक रात भर पूछताछ के लिए रखे जाने को अदालत ने मानव गरिमा के खिलाफ और “चौंकाने वाली स्थिति” करार दिया।
मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के मुख्यालय पर छापेमारी के लिए ईडी को फटकार लगाई और एजेंसी द्वारा शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर रोक लगा दी थी।
जुलाई 2025 में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि “राजनीतिक लड़ाई मतदाताओं के बीच लड़ी जानी चाहिए” और ईडी का इस्तेमाल इसके लिए नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ईडी अधिकारी “सारी हदें पार कर रहे हैं”।
साल 2025 में अदालतों ने विभिन्न मामलों में ईडी की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणियाँ की। अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की समीक्षा के दौरान ईडी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि एजेंसी “एक ठग की तरह काम नहीं कर सकती” और उसे कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा। कोर्ट ने एजेंसी की 10 फीसदी से भी कम दर की दोषसिद्धि पर भी गंभीर सवाल उठाए।
अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी द्वारा वकीलों को भेजे गए समन रद्द करते हुए कहा कि किसी वकील को उसके मुवक्किल की जानकारी देने के लिए मजबूर करना कानूनी पेशे को कमजोर करने वाली एक “खतरनाक प्रवृत्ति” है। इसके बाद ईडी ने आंतरिक आदेश जारी करते हुए बिना निदेशक की अनुमति के किसी वकील को तलब नहीं करने का आदेश दिया।
दिसंबर 2025 में, दिल्ली की एक विशेष अदालत ने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ईडी ने पीएमएलए के तहत अनिवार्य “प्रेडिकेट ऑफेंस” (मुख्य अपराध) के बिना ही कार्रवाई शुरू कर दी थी, जो कानूनी रूप से गलत था।
इसी महीने में दिल्ली हाईकोर्ट ने संपत्ति ज़ब्त करने की प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक खामियों के लिए भी ईडी को फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि एजेंसी को पीएमएलए के तहत निर्धारित तीन-चरणीय ढांचे का सख्ती से पालन करना चाहिए।



