
संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच सोमवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की उस अर्जी पर सुनवाई की। उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत को हरी झंडी दिखा दी थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। इसके लिए पूर्व विधायक को 1 हफ्ते का समय दिया गया है। कुलदीप सेंगर को अगले 7 दिन में जवाब दाखिल करना होगा।
गौर करें तो CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के ऑर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसमें सेंगर की अपील पेंडिंग रहने के दौरान सजा सस्पेंड करने की अर्जी को मंजूरी दी गई थी। पहले पता चला था कि CBI और पीड़ित के परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा जताया था। सर्वाइवर के परिवार वालों ने, महिला अधिकार एक्टिविस्ट के साथ मिलकर, सेंगर की सजा सस्पेंड करने का विरोध किया था, और कहा है कि बेल ऑर्डर ने लोगों का भरोसा हिला दिया है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर गलत मैसेज दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट में, CBI ने सेंगर की अर्जी का कड़ा विरोध किया था, और अपराध की गंभीरता और उसमें शामिल संभावित खतरों पर जोर दिया था। बता दें कि अपने आदेश में, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने सेंगर की उम्रकैद की सजा सस्पेंड कर दी थी और उनकी अपील पेंडिंग रहने तक उन्हें कड़ी शर्तों के साथ कंडीशनल बेल दे दी थी। उन्नाव रेप केस से पूरे देश में गुस्सा फैल गया था। दिसंबर 2019 में, ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को एक नाबालिग लड़की को किडनैप करने और रेप करने का दोषी ठहराया और उन्हें बाकी जिंदगी जेल की सजा सुनाई। साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस घटना से जुड़े सभी केस उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिए थे और निर्देश दिया था कि ट्रायल रोजाना किया जाए।



