
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल नेटवर्क को ध्वस्त किया है. इसमें 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही देश के तीन राज्यों में संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास लगाए गए 9 संदिग्ध CCTV कैमरे बरामद किए हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि इस पूरे मॉड्यूल के तीन प्रमुख पहलू सामने आए हैं. पहला, संवेदनशील इलाकों में सोलर पावर से चलने वाले CCTV कैमरों के जरिए जासूसी. दूसरा, सीमा पार से हथियारों की तस्करी. जबकि, तीसरा कई जगहों पर ग्रेनेड हमले की साजिश.
पाकिस्तान जा रही थी कैमरों की लाइव फीड
एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कपूरथला, जालंधर, पठानकोट, पटियाला, मोगा, अंबाला, कठुआ (जम्मू-कश्मीर), बीकानेर व अलवर जैसे स्थानों पर इन कैमरों को लगाया गया था. ये सभी कैमरे सिम-आधारित थे और इनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी. इनका उद्देश्य संवेदनशील मूवमेंट व सुरक्षा गतिविधियों की जानकारी जुटाना था. स्पेशल सेल ने इस नेटवर्क से चार पिस्टल व कारतूस भी बरामद किए हैं, जिनमें तीन विदेशी पिस्टल भी शामिल हैं. ये हथियार क्रॉस बॉर्डर स्मगलिंग के जरिए भारत पहुंचाए गए थे. साथ ही कई सिम कार्ड व मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं.
न्यूजीलैंड से MBA आरोपी निभा रहा था अहम भूमिका
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल अधिकांश आरोपी पंजाब के हैं, जबकि कुछ दिल्ली के रहने वाले हैं. दिल्ली के आरोपी मुख्य रूप से हथियारों की रिसीविंग व सप्लाई में शामिल थे. रोहिणी निवासी अतुल राठी, जिसने न्यूजीलैंड से MBA किया है, इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था.
युवाओं को ऐसे किया जाता था भर्ती
एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि इस मॉड्यूल का सबसे चिंताजनक पहलू युवाओं की भर्ती का तरीका है. बेरोजगार या आंशिक रूप से रोजगार पाने वाले युवाओं को प्रति कैमरा 15 से 20 हजार रुपये का लालच देकर इस नेटवर्क से जोड़ा गया. कई मामलों में आरोपियों को यह अंदाजा था कि वे गलत गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. नेटवर्क की कार्यप्रणाली भी बेहद गोपनीय थी. एक सदस्य को दूसरे की जानकारी न हो, इसके लिए ‘डेड ड्रॉप’ जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें सामान को एक जगह रखकर दूसरे व्यक्ति द्वारा उठाया जाता था.
ग्रेनेड हमले की थी साजिश, हुई नाकाम
एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाहा के अनुसार, आरोपियों ने कई संवेदनशील प्रतिष्ठानों की वीडियोग्राफी भी करवाई थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटाई जा सके. इसी आधार पर कुछ जगहों पर ग्रेनेड हमले की योजना बनाई गई थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया.
देशभर में सीसीटीवी ऑडिटिंग हुई तेज
एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि पूरे नेटवर्क की फंडिंग हथियारों की बिक्री व ड्रग्स तस्करी से हो रही थी. इसी पैसे का इस्तेमाल CCTV कैमरों की खरीद व इंस्टॉलेशन के लिए किया जा रहा था. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, पिछले 2-3 महीनों से यह गतिविधियां जारी थी. गाजियाबाद में पहले पकड़े गए मॉड्यूल की तरह ही इसके भी विदेशी हैंडलर सक्रिय थे. फिलहाल देशभर में CCTV कैमरों की ऑडिटिंग का काम तेज कर दिया गया है, जिससे इस तरह की किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके.



