
संवाददाता
नई दिल्ली । दिल्ली सरकार अब वायु प्रदूषण के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर रही है. इसी दिशा में सोमवार को पर्यावरण एवं वन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी), नई दिल्ली नगर परिषद, नगर निगम, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 22 नई और असरदार तकनीकों के ट्रायल को तेज़ करना था, जिन्हें देशभर से आई 284 एंट्री में से चुना गया है.
पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषकों को कम करने पर रहेगा जोर
मंत्री सिरसा ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे इन ट्रायल्स के लिए पूरी मदद करें. जैसे जगह की अनुमति देना, डिवाइस लगाने की इजाजत देना, बिजली की व्यवस्था करना और एनओसी जारी करना. उन्होंने कहा कि साइट की अनुमति, गाड़ियों की व्यवस्था और बिजली कनेक्शन में देरी नहीं होनी चाहिए. इन ट्रायल्स का समय पर पूरा होना बहुत जरूरी है, ताकि दिल्ली को साफ हवा के लिए सही और काम करने वाले समाधान मिल सकें. दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किया गया यह इनोवेशन चैलेंज कम लागत और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले ऐसे समाधान ढूंढने पर केंद्रित है, जो पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषकों को कम कर सकें. चाहे वह गाड़ियों से निकलने वाला धुआं हो या वातावरण में मौजूद धूल. शुरुआत में 284 एंट्री आई थीं, जिनमें से 48 को डीपीसीसी द्वारा चुना गया और आगे आईटीईसी को भेजा गया. आईआईटी दिल्ली, सीपीसीबी, एआरएआई (पुणे), एनपीएल, डीटी और मारुति सुजुकी के विशेषज्ञों वाली इस कमेटी ने जांच के बाद 22 इनोवेशन को ट्रायल के लिए चुना.

वाहनों से जुड़े इन 13 समाधानों पर हुआ मंथन
गाड़ियों पर लगने वाले एयर फिल्टर, पीएम कलेक्टर, बीएस-4 वाहनों के लिए रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस , डस्ट कलेक्टर और भारी डीजल वाहनों के लिए आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम. 9 वातावरण से जुड़े समाधान: बड़े एयर प्यूरीफायर, एयर ट्रीटमेंट टावर, पोल और रोड डिवाइडर पर लगने वाले डस्ट कलेक्टर और रेडियो वेव आधारित पार्टिकल कंट्रोल तकनीक. इन 22 इनोवेशन के ट्रायल के लिए सरकार हर एक पर लगभग 10 लाख तक खर्च कर सकती है, ताकि इनका सही तरीके से परीक्षण किया जा सके. इसके अलावा, टॉप परफॉर्म करने वाले इनोवेटर्स को पुरस्कार भी दिए जाएंगे. पहले स्थान पर 50 लाख, दूसरे स्थान पर 25 लाख और तीसरे स्थान पर 10 लाख. इन तकनीकों को आईएसबीटी कश्मीरी गेट, लाल किला मैदान, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, फायर स्टेशन, और पंजाबी बाग, कीर्ति नगर, रोहिणी जैसे इलाकों में लगाया जाएगा.
आईआईटी दिल्ली द्वारा की जाएगी इन ट्रायल की निगरानी
इन ट्रायल्स की निगरानी आईआईटी दिल्ली, नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी द्वारा की जाएगी, जिससे डेटा पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा किया जा सके. मई के अंत तक डेटा इकट्ठा किया जाएगा, मई-जून में उसका मूल्यांकन होगा और जुलाई 2026 तक सरकार को अंतिम सिफारिशें दी जाएंगी. सिरसा ने इनोवेटर्स के प्रयासों की सराहना की और आईटीईसी तथा डीपीसीसी की टीम की मेहनत को भी सराहा.
बैठक में ट्रायल के बाद की योजना पर भी चर्चा हुई, जिसमें सफल तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने और सरकारी स्तर पर अपनाने की रणनीति शामिल है. अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि दिल्ली की जनता को बेहतर हवा और बेहतर जीवन देना हमारी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि यह पूरे शहर का सामूहिक प्रयास है, जिसमें हर विभाग, वैज्ञानिक और इनोवेटर की महत्वपूर्ण भूमिका है.



