
संवाददाता
नई दिल्ली। सरकारी अस्पताल में मरीजों को मुफ्त वितरण के लिए आने वाली दवाओं की हेराफेरी और बिक्री करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ कर क्राइम ब्रांच ने पांच आरोपित को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में एक डीडीयू अस्पताल में फार्मासिस्ट कम स्टोर कीपर व दूसरा अस्पताल में ठेके पर काम करने वाला हेल्पर शामिल है।
इन दोनों की मदद से सिंडिकेट में शामिल सदस्य डीडीयू अस्पताल से एंटीबायोटिक्स और गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेबीज व अन्य इंजेक्शन चोरी कर उन्हें सहारनपुर में दवा विक्रेताओं को बेच देते थे।
महिंद्रा चैंपियन टेम्पो और एक बलेनो कार जब्त की गई
एक आरोपित की सहारनपुर में दवा की दुकान है, जिससे वह सरकारी दवाओं को अपनी दुकान पर बेचने के साथ ही अपनी जान पहचान के दवा विक्रेताओं को भी सरकारी दवा बेच देते थे। इनके कब्जे से करीब 70 लाख की दवाईयां व इसके परिवहन में इस्तेमाल महिंद्रा चैंपियन टेम्पो और एक बलेनो कार जब्त की गई है।
डीसीपी, क्राइम ब्रांच, पंकज कुमार के मुताबिक इंस्पेक्टर नीरज शर्मा की टीम ने पहले तीन आरोपित नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया को जय भारत ट्रांसपोर्ट, राजेंद्र मार्केट, तीस हजारी में उस समय गिरफ्तार किया जब वे एक टेम्पो और एक कार में दवाओं की खेप लेकर जा रहे थे।
बड़ी मात्रा में जरूरी दवाएं बरामद की गईं
इन दवाओं पर सरकारी आपूर्ति, बिक्री के लिए नहीं शब्द लिखा हुआ था। वाहनों से बड़ी मात्रा में जरूरी दवाएं बरामद की गईं, जिनमें एंटीबायोटिक्स और गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन शामिल थे। पूछताछ से पता चला कि ये लोग करीब डेढ़ साल से बिचौलियों की एक कड़ी के तौर पर इस अवैध आपूर्ति नेटवर्क को चला रहे थे।
वाहनों से सेफिक्साइम, एमोक्सिसिलिन के साथ क्लैवुलनेट, सेफ्ट्रिएक्सोन, सेफ्टाज़िडाइम, मेरोपेनेम, एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन, रेबीज एंटीसीरम आदि दवाइयां बरामद की गई। ये लोग डेढ़ साल से डीडीयू अस्पताल से सरकारी दवाइयां चोरी कर उन्हें सहारनपुर के आसपास दलालों के जरिए खुले बाजार में बेच रहे थे।
तीनों से पूछताछ के आधार पर दो और आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें एक का नाम बिनेश कुमार (डीडीयू अस्पताल में फार्मासिस्ट कम स्टोर कीपर) व दूसरे का नाम प्रकाश महतो (डीडीयू अस्पताल में ठेके पर काम करने वाला हेल्पर) है।
इस पूरे रैकेट की गहराई तक पहुंचने के प्रयास जारी
ये दोनों अस्पताल के स्टाक से दवाओं को निकालकर (डायवर्ट करके) और रिकॉर्ड में हेराफेरी करके, उन्हें अवैध रूप से बेचने में शामिल थे। गिरोह के अन्य साथियों की पहचान करने, पैसों के लेन-देन का पता लगाने और इस पूरे रैकेट की गहराई तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
1. नीरज कुमार का सहारनपुर में “आदित्य फार्मेसी” नाम से थोक दवा का कारोबार है। वह 1.5 साल से दिल्ली से अवैध रूप से सरकारी दवाइयां हासिल कर उन्हें दलालों के माध्यम से खुले बाजार में बेच रहा था। वह इस रैकेट में मुख्य रिसीवर और वितरक के तौर पर काम करता था।
2. सुशील कुमार भी सहारनपुर का रहने वाला है और पेशे से टैक्सी ड्राइवर है। वह दिल्ली से सहारनपुर तक दवाइयां पहुंचाने में नीरज कुमार की मदद करता था। दवाओं की खेप ले जाने के लिए वह अपनी गाड़ी का इस्तेमाल करता था। उसे हर ट्रिप का पैसा मिलता था।
3. लक्ष्मण मुखिया, जनकपुरी का रहने वाला है और टेम्पो ड्राइवर है। वह डीडीयू अस्पताल से चोरी की दवाओं की खेप को ट्रांसपोर्ट हब तक पहुूंचाने का काम करता था।
4. बिनेश कुमार, पश्चिम एन्क्लेव का रहने वाला है और अस्पताल में फार्मासिस्ट था। रिकार्ड में हेर फेर करके और सप्लाई की एंट्री कम करके अस्पताल के स्टाक से सरकारी दवाइयां चोरी कर बेच देता था
5. प्रकाश महतो, महावीर एन्क्लेव का रहने वाला है और डीडीयू अस्पताल के दवा स्टोर में ठेके पर हेल्पर था। बिनेश कुमार और नीरज कुमार के बीच वह बिचौलिए का काम करता था।



