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जीएसटी ने भरी सरकार की झोली, हुआ रिकॉर्ड तोड़ कलेक्शन

संवाददाता

नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत सरकार के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। मार्च महीने में जीएसटी कलेक्शन ने ऐसा आंकड़ा छुआ है जिसने पिछले रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिए हैं। 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन यह दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे मजबूती आ रही है। खास बात यह है कि इस बढ़त में घरेलू बाजार के साथ-साथ इंपोर्ट का भी बड़ा योगदान रहा है।

सरकार के जारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च में जीएसटी कलेक्शन में 8.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा करीब 1.83 लाख करोड़ रुपए था जो इस बार 2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया।

इस बढ़त के पीछे कई वजहें हैं। घरेलू कारोबार में तेजी आई है लोगों की खरीदारी बढ़ी है और इंपोर्ट से भी टैक्स कलेक्शन में अच्छा उछाल देखने को मिला है। खासकर इंपोर्ट से मिलने वाला टैक्स करीब 17.8 प्रतिशत तक बढ़ा है जो इस उछाल का एक बड़ा कारण बना।

अगर विस्तार से देखें तो घरेलू रेवेन्यू भी करीब 5.9 प्रतिशत बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया। इसका मतलब साफ है कि देश के अंदर कारोबार में सुधार हो रहा है। वहीं दूसरी ओर इंपोर्ट से आने वाला टैक्स तेजी से बढ़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी सामान की मांग भी बनी हुई है और व्यापार गतिविधियां सक्रिय हैं।

मार्च के दौरान जीएसटी रिफंड में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिली। रिफंड करीब 13.8 प्रतिशत बढ़कर 22,074 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसके बावजूद जब रिफंड को घटाकर नेट कलेक्शन देखा गया तो यह करीब 1.78 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले साल के मुकाबले 8.2 प्रतिशत ज्यादा है। यानी सरकार की वास्तविक कमाई भी मजबूत बनी हुई है।

अगर पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कुल GST कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। रिफंड को हटाने के बाद नेट कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपए रहा, जिसमें 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि पूरे साल टैक्स कलेक्शन में स्थिर और अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।

जीएसटी कलेक्शन में राज्यों का योगदान भी दिलचस्प रहा। महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा टैक्स कलेक्शन किया, जिसके बाद कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा। कुछ राज्यों में अच्छी बढ़त देखने को मिली जैसे-उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और तमिलनाडु। वहीं कुछ राज्यों में गिरावट भी दर्ज की गई जिससे यह साफ होता है कि देशभर में आर्थिक गतिविधियां समान रूप से नहीं बढ़ रही हैं।

जीएसटी कलेक्शन में यह उछाल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि देश की आर्थिक स्थिति का संकेत है। जब टैक्स कलेक्शन बढ़ता है तो इसका मतलब होता है कि व्यापार बढ़ रहा है, लोगों की खरीदारी बढ़ रही है और बाजार में गतिविधियां तेज हो रही हैं।

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