latest-newsदेश

कांग्रेस से क्यों खाली करवाया जा रहा 24 अकबर रोड बंगला, 2006 की इस पॉलिसी में जवाब, 13 साल पहले ही रद्द हो चुका आवंटन

संवाददाता

नई दिल्ली । एक बार फिर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच तनातनी की स्थिति बनती दिख रही है. इस बार वजह 2 सरकारी बंगलों को खाली करने के नोटिस से जुड़ा हुआ है. कांग्रेस के नेताओं ने कल बुधवार को बताया कि केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस को बंगला खाली करने से जुड़े 2 नोटिस भेजे गए हैं, जिसमें उससे शनिवार (28 मार्च) तक 24 अकबर रोड स्थित अपना ऑफिस और 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस का मुख्यालय खाली करने को कहा गया है.

कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि केंद्र की ओर से यह नोटिस 13 मार्च को भेजे गए. लेकिन पार्टी बेदखली से जुड़े इन नोटिसों के खिलाफ कोर्ट का रूख करने पर विचार कर रही है. हालांकि, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) की 2006 की एक नीति के तहत, राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों को अपना ऑफिस बनाने के लिए जमीन आवंटित की जा सकती है. यदि वे यह आवंटन स्वीकार कर लेते हैं, तो उन्हें जमीन का कब्जा लेने की तारीख से 3 साल के अंदर उन सभी बंगलों या अन्य कैंपस को खाली करना होता है, जो उन्हें पहले आवंटित किए गए थे.

DDU मार्ग पर कांग्रेस को मिली जमीन

कांग्रेस ने दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर पार्टी को आवंटित भूखंड पर साल 2009 में निर्माण कार्य शुरू किया था. और ‘इंदिरा भवन’ नाम की यह इमारत पिछले साल 2025 में बनकर तैयार हुई. इस नई इमारत को कांग्रेस मुख्यालय बनाया गया. नया मुख्यालय बनने के बाद भी कांग्रेस ने अकबर रोड (जो 1978 से उसका मुख्यालय रहा है) और रायसीना रोड, दोनों जगहों पर अपना कब्जा बनाए रखा है.

MoHUA के अधीन ‘संपदा निदेशालय’ (Directorate of Estates) के रिकॉर्ड के अनुसार, जिन्हें ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) एक्ट के तहत हासिल किया गया था- कांग्रेस को आवंटित 3 ‘टाइप-VIII’ बंगलों (5 रायसीना रोड, 24 अकबर रोड और 26 अकबर रोड) का आवंटन करीब 13 साल पहले ही 26 जून, 2013 को रद्द कर दिया गया था. तब पार्टी ने 26 अकबर रोड स्थित यह बंगला खाली कर दिया था, जहां पहले ‘सेवा दल’ का ऑफिस हुआ करता था.

BJP ने भी लंबे समय तक बनाए रखा कब्जा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी, 20 अगस्त, 2017 को आवंटन रद्द होने के बाद भी, कुछ सालों तक 11 अशोक रोड स्थित अपने ऑफिस को अपने पास बनाए रखा था. बीजेपी ने साल 2018 में DDU मार्ग पर अपना नया ऑफिस बनाया और वहीं पर शिफ्ट कर गई. हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने 11 अशोक रोड स्थित इस बंगले को साल 2024 तक अपने पास बनाए रखा था.

बाद में, यह बंगला बीजेपी के ही एक सांसद को आवंटित कर दिया गया. L&DO की 13 जुलाई, 2006 की नीति, जो चुनाव आयोग की ओर से मान्यता प्राप्त सभी राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ उन राज्य स्तरीय पार्टियों पर भी लागू होती है जिनके संसद के दोनों सदनों में कम से कम 7 सांसद हैं, कहती है, “अगर कोई राजनीतिक दल अपने ऑफिस के लिए सरकारी बंगला या सुइट इस्तेमाल कर रही है. तो उसे ऑफिस के लिए अलॉट की गई जमीन पर इमारत बनने के तुरंत बाद, या जमीन का खाली कब्जा मिलने की तारीख से 3 साल के अंदर (जो भी पहले हो) उसे खाली कर देना चाहिए.”

पार्टी को जमीन के लिए एक प्रीमियम और सालाना जमीनी किराया देना होगा. यह जमीन लीज पर दी जाएगी और इसे फ़्री-होल्ड प्रॉपर्टी में बदलने का अधिकार नहीं होगा. दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि अगर अलॉटी यानी जमीन पाने वाला अलॉटमेंट की शर्तों/MOA (समझौता ज्ञापन) या लीज डीड के मुताबिक प्रीमियम और जमीनी किराया या कोई अन्य सरकारी बकाया चुकाने में नाकाम रहता है, तो अलॉटमेंट रद्द किया जा सकता है.”

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों का अपने बंगलों पर कब्जा बनाए रखना, साल 2006 की पॉलिसी का खुला उल्लंघन माना गया. साल 2022 में, तत्कालीन केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि अगर किसी पार्टी को जमीन भी अलॉट की गई है, तो उसे अपने अलॉट किए गए बंगले को खाली करना होगा. तब उन्होंने कहा था, “यह (राजनीतिक दलों से बंगले खाली करवाना) प्रक्रिया अभी चल रही है. इसमें सभी राजनीतिक पार्टियां शामिल होंगी. यह प्रक्रिया अभी पाइपलाइन में है.”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com