
संवाददाता
नई दिल्ली । दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, सुगम व यात्री-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने दिल्ली बस नेटवर्क के लिए व्यापक रूट रेशनलाइजेशन स्टडी को मंजूरी दी है. यह अध्ययन आईआईटी दिल्ली के TRIP सेंटर की ओर से किया जाएगा, जिसमें बूस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप (बीसीजी) और जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) का सहयोग रहेगा. अध्ययन के लिए इनके बीच सोमवार को कॉन्ट्रैक्ट भी हुआ.
डीटीसी के डिप्टी सीजीएम (पीआर) अमन देव छिकारा ने बताया कि इस परियोजना के तहत दिल्ली में बसों के रूट का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्धारण किया जाएगा. अध्ययन की अवधि मार्च 2026 से फरवरी 2027 यानी कुल 12 महीने तय की गई है. इसके तहत मौजूदा बस नेटवर्क का विश्लेषण कर यात्रियों की जरूरत, ट्रैफिक पैटर्न और कनेक्टिविटी के आधार पर नए रूट व सेवा संरचना तैयार की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली में रूट निर्धारण का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि राजधानी के अन्य हिस्सों में यह प्रक्रिया जारी है. लक्ष्य है कि एक साल के भीतर पूरे शहर में रूट रेशनलाइजेशन लागू कर दिया जाए.
14 हजार बसों के नेटवर्क पर असर
यह पहल सिर्फ मौजूदा सिस्टम तक सीमित नहीं है. वर्तमान में चल रही लगभग 7,000 बसों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से जोड़ी जा रही 7,000 नई बसों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा. इससे पूरे बस नेटवर्क का एकीकृत व संतुलित विकास सुनिश्चित होगा. परियोजना को सफल बनाने के लिए डीटीसी ने अध्ययन टीम को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिया है. इसमें संचालन और यात्रियों से जुड़े आंकड़ों की उपलब्धता, फील्ड सर्वे व सवारियों से संवाद में सहायता, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी सुविधाएं डीटीसी की तरफ से मुहैया कराई जाएंगी. इसके साथ ही हर पंद्रह दिन में प्रगति समीक्षा की व्यवस्था भी की गई है, जिससे परियोजना समय पर पूरी हो सके.
यात्रियों को क्या होगा फायदा
रूट रेशनलाइजेशन के बाद राजधानी दिल्ली के बस यात्रियों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे, जैसे- बस के इंतजार का समय घटेगा, कुल यात्रा समय में कमी आएगी, बेहतर रूट प्लानिंग व बसों की आवृत्ति बढ़ेगी, शहर में कनेक्टिविटी और मजबूत होगी, कम सेवा वाले इलाकों में भी बस सुविधा पहुंचेगी. इन सब सुविधाओं से न सिर्फ यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि उनका समय भी बचेगा. बस स्टैंड पर बसों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा.
डेटा आधारित होगा पूरा प्लान
डीटीसी अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा अध्ययन डेटा आधारित और वैज्ञानिक पद्धति पर किया जाएगा. यात्री संख्या, रूट डिमांड, ट्रैफिक कंडीशन व ग्राउंड सर्वे के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे, जिससे बस नेटवर्क अधिक कुशल व विश्वसनीय बन सके. डीटीसी अधिकारियों का कहना है कि यह पहल राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगी. लोगों को अधिक सुगम, तेज व भरोसेमंद बस सेवा उपलब्ध कराएगी.



