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दिल्ली में 60 लाख लोग नजर की समस्या से जूझ रहे, WHO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में करीब 29.5 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 60 लाख लोग, रिफ्रैक्टिव एरर यानी नजर से जुड़ी समस्याओं से प्रभावित हैं.

संवाददाता

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आँखों की सेहत को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के रिफ्रैक्टिव एरर सिचुएशन एनालिसिस टूल यानी RESAT के तहत दिल्ली में नजर से जुड़ी समस्याओं का आकलन किया गया है. इस रिपोर्ट को AIIMS के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थाल्मिक साइंसेज़ ने तैयार किया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग बिना सही इलाज के नजर की समस्या से जूझ रहे हैं. आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या-क्या सामने आया है.

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में करीब 29.5 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 60 लाख लोग, रिफ्रैक्टिव एरर यानी नजर से जुड़ी समस्याओं से प्रभावित हैं. इन समस्याओं में मायोपिया यानी दूर की चीजें साफ न दिखना और प्रेस्बायोपिया यानी उम्र बढ़ने के साथ नजर कमजोर होना शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या लगभग 70 प्रतिशत तक पाई जाती है. वहीं अगर बच्चों की बात करें तो स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया सबसे आम समस्या के रूप में सामने आई है और नई दिल्ली में इसकी दर करीब 13.1 प्रतिशत दर्ज की गई है.

दिल्ली में 60 लाख लोग नजर की समस्या से प्रभावित

साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक दूर की नजर के इलाज की कवरेज 59.8 प्रतिशत,जबकि नजदीक की नजर के लिए यह 47.1 प्रतिशत रही. हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में नजर के इलाज की सेवाएं कम मिल पा रही हैं. राजधानी में 249 आई केयर संस्थान मौजूद हैं. इनमें से करीब 77 प्रतिशत निजी क्षेत्र में,जबकि 14 प्रतिशत सरकारी क्षेत्र में और करीब 8 प्रतिशत संस्थान गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित हैं.

ऑप्टोमेट्रिस्ट की कमी एक बड़ी चुनौती

दिल्ली में इस समय 1085 नेत्र विशेषज्ञ और 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट तथा तकनीशियन लोगों को सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद ऑप्टोमेट्रिस्ट की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर जितने विजन सेंटर होने चाहिए, उनके मुकाबले अभी बहुत कम सेंटर ही काम कर रहे हैं. इसके अलावा स्कूलों में बच्चों की आंखों की जांच की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 25 प्रतिशत बच्चों को ही मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराए गए हैं.

नजर से जुड़ी समस्याएं एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थाल्मिक साइंसेज़, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने कहा कि दिल्ली में नजर से जुड़ी समस्याएं एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनती जा रही हैं. बड़ी संख्या में लोग बिना सही जांच और इलाज के इन समस्याओं से प्रभावित हैं. उन्होंने बताया कि अगर समय पर आंखों की जांच हो और जरूरत के मुताबिक चश्मे उपलब्ध कराए जाएं तो इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

डॉ. वशिष्ठ ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में विजन सेंटर बढ़ाने, स्कूलों में नियमित आई स्क्रीनिंग और प्रशिक्षित नेत्र स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार और स्वास्थ्य संस्थान मिलकर काम करें तो आंखों से जुड़ी इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है और लोगों को बेहतर आई केयर सेवाएं मिल सकती हैं.

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