
संवाददाता
तेहरान। इजराइल और अमेरिका का ईरान पर हमला जारी है। वहीं ईरान की ओर से भी जवाबी हमला किया जा रहा है। युद्ध शुरू होने के दूसरे दिन रविवार को ईरान में कई जगहों पर धमाके की आवाज सुनी गई। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उसके एक हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। इसके साथ ही हमले में उनकी बेटी, दामाद, नाती भी मारी गईं. आज ईरानी मीडिया ने भी खामेनेई के मारे जाने को लेकर पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही इन हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नसीरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपोर भी मारे गए। इस बीच ईरान में कई जगहों पर लोगों को सड़कों पर पोस्टरों के साथ देखा गया। ईरानी सेना के नए प्रमुख अहमद वाहिदी बन गए हैं।
मिडिल ईस्ट एयरस्पेस पर पाबंदियां, 444 फ्लाइट हो सकती है कैंसिल
ईरान के इस इलाके के कई देशों में अमेरिकी बेस पर जवाबी हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस पर पाबंदियों की वजह से भारतीय एयरलाइंस आज (रविवार, 1 मार्च 2026) 444 इंटरनेशनल फ्लाइट कैंसिल कर सकती है। सिविल एविएशन मंत्रालय ने रविवार सुबह एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘ईरान और मिडिल ईस्ट के कुछ हिस्सों में एयरस्पेस पर पाबंदियों की वजह से 28 फरवरी को घरेलू एयरलाइन्स की 410 फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई, और 1 मार्च को 444 फ्लाइट कैंसिल होने की उम्मीद है।’
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में भारी उथल-पुथल, सड़कों पर उतरे जश्न और मातम
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ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद वहां भारी उथर-पुथल देखने को मिल रही है। एक ओर जहां सड़कों पर शासन विरोधी उतरकर लोग इसे आजादी का अवसर बता रहे हैं, तो वहीं, दूसरी ओर शासन के सहयोगी लोग अपने नेता के खोने के गम में डूबे नजर आ रहे हैं। शनिवार को इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान में हुए हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर लोग सड़कों पर उतर आए हैं, और अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी। खामनेई की मौत पर ईरान में रहे जश्न और मातम गहरे विभाजन का संकेत दे रहा है।
ईरान पर हमले को अमेरिका ने बताया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
अमेरिका ने इजरायल की मदद से ईरान पर हमले को यूएस ने ऑरपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है। इस बात की जानकारी शनिवार को पेंटागन ने दी है। खबर है कि यह हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस के पास हुआ। यह स्ट्राइक ऐसे समय की गई है जब तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है।
ट्रंप क्या चाहते हैं?

ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एक डील चाहते थे और ईरान इसके लिए तैयार नहीं। ऐसे में जब ईरान के अंदर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं और देश अशांति से जूझ रहा है तो ट्रंप को इसमें एक मौका दिख रहा है। वहीं, ईरान को उम्मीद थी कि वह युद्ध टाल देगा, लेकिन उसका कहना है कि उसे यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार है और वह अपने लंबी-रेंज मिसाइल प्रोग्राम या हमास और हिजबुल्लाह जैसे हथियारबंद ग्रुप्स को सपोर्ट जैसे दूसरे मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने कहा कि यह हमला “खतरों को दूर करने” के लिए किया गया था। उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के कई अस्पतालों ने अपने इमरजेंसी प्रोटोकॉल शुरू कर दिए हैं। मरीजों को अंडरग्राउंड जगहों पर ले जाया गया है। इजरायल ने जैसे ही अपना एयरस्पेस बंद किया पूरे इजरायल में सायरन बजने लगे। इजरायली सेना ने कहा कि उसने इजरायल की तरफ मिसाइल दागे जाने की संभावना के लिए जनता को तैयार करने के लिए एक प्रोएक्टिव अलर्ट जारी किया था।
ईरान में कैसे होता है सुप्रीम लीडर का चयन? खामेनेई के बेटे मोजतबा को सत्ता मिलना तय

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब ईरान की सत्ता पर खामेनेई के बेटे मुजतबा को बैठाया जा सकता है। मुजतबा का ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनना तय हो गया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जल्द से जल्द नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति को लेकर फैसला ले सकता है।
इजरायल और अमेरिका के हमले से ईरान में दहशत का माहौल है। खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया जा सकता है। IRGC नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति के लिए कानूनी प्रक्रिया को कम कर सकता है या सीधे ही नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति करने का फैसला ले सकता है। ईरानी संविधान के मुताबिक, सुप्रीम लीडर का चयन 88 वरिष्ठ धार्मिक विद्वानों वाली एक परिषद करती है। ‘विलायत-ए-फकीह’ के सिद्धांत पर ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन होता है। ईरान में इस सिद्धांत के तहत केवल किसी बड़े धार्मिक विद्वान या मौलवी को ही सुप्रीम लीडर का पद मिल सकता है।
मुजतबा के सुप्रीम लीडर बनने में एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। अयातुल्ला अली खामेनेई ने मौत से पहले उत्तराधिकारी का नाम सार्वजनिक रूप से तय नहीं किया था। इस वजह से ही ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन मुश्किल हो गया है।



