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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया दधीचि देहदान समिति द्वारा आयोजित फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन

फिल्मों से गूंजेगा अंगदान का संदेश, दिल्ली में 'वरदान' फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ

संवाददाता

नई दिल्ली। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के ईस्ट दिल्ली कैंपस में दधीचि देहदान समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘वरदान’ फिल्म फेस्टिवल का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन किया। उन्होंने दधीचि देहदान समिति के प्रयासों की सराहना की।

दिल्ली सीएम ने अंगदान और देहदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वर्ष 2016 में उन्होंने खुद बॉडी डोनेशन का फॉर्म भरा था। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और समिति के सभी पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीते जी रक्तदान और मृत्यु के बाद देहदान दोनों ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।

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उन्होंने आगे कहा कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से जीवित रह सकता है। आपका दिल किसी और व्यक्ति में धड़क सकता है और आपकी आंखें किसी और के जीवन में रोशनी बन सकती हैं। देश में हजारों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं और समय पर अंगदान न मिलने से अनेक जीवन असमय समाप्त हो जाते हैं।

दिल्ली सीएम ने कहा कि इस तरह के फिल्म फेस्टिवल समाज में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम हैं। दो दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अंगदान और देहदान पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम के आयोजकों का उद्देश्य कला और सिनेमा के माध्यम से समाज को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ते हुए अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना है। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दधीचि देहदान समिति के संस्थापक आलोक कुमार और फेस्टिवल डायरेक्टर अतुल गंगवार के अलावा पूर्वी दिल्ली से सांसद एवं राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और मशहूर अभिनेता मनोज जोशी उपस्थित रहे।

यह दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल दधीचि देहदान समिति और संप्रेषण मल्टीमीडिया के सहयोग से किया जा रहा है। समिति पिछले कई वर्षों से अंगदान और देहदान को लेकर जागरूकता फैलाने का काम कर रही है। अब उसी सोच को सिनेमा के माध्यम से और बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

फेस्टिवल में भारत और विदेश से चुनी गई 70 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन फिल्मों के जरिए अंगदान, देहदान, मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी प्रेरक कहानियां दिखाई जाएंगी।

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