
संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘तुष्टिकरण’ की बहस छिड़ गई है. परभणी महानगरपालिका (Parbhani Municipal Corporation) के चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना (Shiv Sena UBT) ने एक बड़ा सियासी दांव खेलते हुए सैय्यद इकबाल (Syed Iqbal) को मेयर चुना है. उद्धव गुट के इस फैसले ने महाविकास अघाड़ी (MVA) की एकता तो दिखाई है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हमला करने का मौका दे दिया है. बीजेपी ने उद्धव ठाकरे की पार्टी को उनकी बदलती विचारधारा पर हमले किए हैं.
बीजेपी के उम्मीदवार को हार
बीजेपी ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया लेकिन उनका उम्मीदवार हार गया. बीजेपी की प्रत्याशी तिरुमाला खिल्लारे को महज 26 वोटों से संतोष करना पड़ा. वहीं, डिप्टी मेयर पद पर कांग्रेस का कब्जा गठबंधन धर्म निभाते हुए उद्धव गुट ने डिप्टी मेयर का पद कांग्रेस को दिया. कांग्रेस के गणेश देशमुख 37 वोटों के साथ उप-मेयर चुने गए. वहीं, इस रेस में खड़ी एनसीपी की नाज़िमा अब्दुल रहीम को 27 वोट मिले और उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
कहां गया उद्धव का हिंदुत्व
बीजेपी ने मुस्लिम मेयर चुने जाने के बाद उद्धव पर हमला बोला है. सैय्यद इकबाल के मेयर बनते ही बीजेपी ने मोर्चा खोल दिया है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना अब पूरी तरह बदल चुकी है. उनका कहना है कि सत्ता में बने रहने और वोट बैंक की राजनीति के लिए उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे को पीछे छोड़ दिया है. परभणी के नतीजों को बीजेपी अब राज्य भर में उद्धव ठाकरे के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है.



