
ट्रिपल मर्डर की पूरी कहानी, पुलिस की जुबानी
सुनील वर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली के पीरागढ़ी में कार से मिली तीन लाशों की गुत्थी आखिरकार सुलझ गई. पुलिस जांच में सामने आया कि यह हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी. ‘धनवर्षा’ के नाम पर लालच देकर एक स्वयंभू तांत्रिक ने तीनों को जाल में फंसाया. लोनी से लौटते वक्त जहरीले लड्डू खिलाकर उनकी हत्या कर दी गई. तकनीकी सबूतों ने कार में चौथे शख्स की मौजूदगी का राज खोला और अब आरोपी कमरुद्दीन उर्फ बाबा सलाखों के पीछे है. आइए जानते हैं इस ट्रिपल मर्डर की पूरी कहानी, पुलिस की जुबानी.
सुबह का वक्त था. पीरागढ़ी इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक सफेद टाटा टिगोर कार के अंदर तीन लोग बेसुध पड़े मिले थे. PCR कॉल के जरिए सूचना पुलिस तक पहुंची. इस सिलसिले में मामला पश्चिम विहार ईस्ट थाने में दर्ज किया गया. मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने देखा कि एक बुजुर्ग ड्राइवर सीट पर था, एक शख्स को पब्लिक बाहर निकाल चुकी थी और एक महिला कार के भीतर पड़ी थी. तीनों को तुरंत संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया. लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पहली नजर में ही मामला रहस्यमयी लग रहा था.
कौन थे तीनों मृतक?
पुलिस की तफ्तीश के दौरान मृतकों की शिनाख्त 76 वर्षीय रणधीर, 42 वर्षीय शिव नरेश और 40 वर्षीय लक्ष्मी के तौर पर हुई. रणधीर दिल्ली के बापरोला गांव के रहने वाले थे. शिव नरेश प्रॉपर्टी डीलर थे और नागली डेयरी इलाके में रहते थे. लक्ष्मी जहांगीरपुरी की निवासी थीं. तीनों एक ही कार में कैसे और क्यों थे, यही सबसे बड़ा सवाल था. परिवारवालों को सूचना दी गई तो उन्होंने साफ कहा कि यह आत्महत्या नहीं हो सकती. इसके पीछे कुछ और साजिश है.

जब पुलिस ने उस कार की तलाशी ली तो कई चौंकाने वाली चीजें बरामद हुईं. शराब की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक, खाली गिलास, हेलमेट, जैकेट, मोबाइल फोन, नकदी और आधार कार्ड सहित कई दस्तावेज मिले. ऐसा लग रहा था कि कार के अंदर पार्टी जैसा माहौल था. लेकिन सवाल था कि अगर यह सामान्य मिलना-जुलना था तो तीनों की मौत कैसे हुई? शराब और ठंडे पेय में क्या मिलाया गया था? या फिर कुछ और खेल हुआ था?
पुलिस को 8 फरवरी को दोपहर करीब 3.30 में सूचना मिली थी कि पुलिस पश्चिम विहार ईस्ट थाना क्षेत्र में पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास एक कार खड़ी है, जिसमें तीन लोग अचेत पड़े हैं. मौके पर पहुंची पुलिस को कार अंदर तीनों मिले. उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरो ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. कार की जांच करने पर उसमें से शराब और कोल्ड ड्रिंक की बोतल, तीन ग्लास, सभी के मोबाइल और कुछ नकदी बरामद हुए.
प्राथमिक जांच में तीनों के जहर से मौत की पुष्टि हुई. मौत की इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस ने पूछताछ के साथ ही तकनीक का सहारा लिया. तीनों के ही मोबाइल के काल डिटेल निकाले गए. जिसमें पुलिस को एक संदिग्ध नंबर मिला, जोकि तीनों के मोबाइल में थे, वे उनके संपर्क में घटना के कुछ समय पहले तक थे.
जांच की दिशा बदली
परिवार के बयान के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका से जांच शुरू की. आउटर दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा की अगुवाई में तकनीकी विश्लेषण किया गया. कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रैकिंग से बड़ा सुराग मिला. पता चला कि तीनों मृतक घटना से एक दिन पहले और फिर उसी दिन गाजियाबाद के लोनी इलाके में गए थे. वे किसी तांत्रिक के संपर्क में थे. यही से जांच की सुई एक किरदार पर आकर टिक गई. नाम है- कमरुद्दीन उर्फ बाबा.
‘धनवर्षा’ का झांसा
कमरुद्दीन, जो लोनी और फिरोजाबाद में तथाकथित तांत्रिक केंद्र चलाता था, लोगों को “धनवर्षा” का लालच देता था. वह कहता था कि थोड़े पैसे लगाओ और चमत्कार से कई गुना पैसा पाओ. लक्ष्मी सबसे पहले उससे अपने पति की बीमारी को लेकर मिली थी. लेकिन इलाज की बात धीरे-धीरे धनवर्षा की लालच में बदल गई. बाबा ने शॉल से नोटों की गड्डियां निकालकर ऐसा जादू दिखाया कि सामने वाले को भरोसा हो जाए.
लालच का जाल व जहरीले लड्डू की साजिश
लक्ष्मी ने यह बात अपने परिचित शिव नरेश और रणधीर को बताई. तीनों ने मिलकर तय किया कि अगर सच में धनवर्षा हो सकती है तो 2 लाख रुपये लगा देते हैं. तय हुआ कि पूजा होगी और पैसा कई गुना होकर लौटेगा. 8 फरवरी को तीनों 2 लाख रुपये, शराब और कोल्ड ड्रिंक लेकर लोनी पहुंचे. वहां बाबा कमरुद्दीन उनसे मिला. मगर उसने चालाकी से कार में इस तरह बैठने की कोशिश की कि सीसीटीवी में साफ नजर न आए. पुलिस ने बताया कि आरोपित ने साजिश के तहत पहले से ही जहरीले लड्डू तैयार कर रखे थे. 8 फरवरी को जब आरोपित पीड़ितों के साथ उनकी कार में सवार था, उसने मौका पाकर उन्हें जहर मिले हुए लड्डू खिला दिए. जैसे ही तीनों अचेत हुए, आरोपित उनके पास मौजूद 2 लाख रुपये लूटकर फरार हो गया.
तकनीकी सबूतों से पुष्टि हुई कि वापसी के दौरान कार में एक चौथा व्यक्ति मौजूद था और वह शख्स था कमरुद्दीन. जैसे ही तीनों की हालत बिगड़ने लगी, वह कार से उतर गया. बाद में वही कार पीरागढ़ी में खड़ी मिली.
पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट
शुरुआती जांच में जहर की आशंका जताई गई. लड्डुओं में क्या मिलाया गया था, इसका खुलासा विसरा रिपोर्ट से होगा. लेकिन पूछताछ में कमरुद्दीन ने स्वीकार किया कि उसका इरादा शुरू से हत्या का था. उसने पहले भी इसी तरह लोगों को लालच देकर फंसाया था. पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया. तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी की मौजूदगी की पुष्टि करने में जुटी हैं.
पूछताछ में खुलासा

गिरफ्तारी के बाद कमरुद्दीन ने पहले जांच को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन लगातार पूछताछ में उसने कबूल किया कि करीब दो महीने पहले लक्ष्मी को सलीम नाम के व्यक्ति ने उससे मिलवाया था. धीरे-धीरे उसने तीनों का विश्वास जीत लिया. उसने कहा था कि अगर 2 लाख रुपये और पूजा सामग्री लाओगे तो धनवर्षा होगी. असल में उसकी नजर उनके पैसों पर थी.

बाबा का आपराधिक रिकॉर्ड
तांत्रिक कमरुद्दीन कोई नया खिलाड़ी नहीं है. उसका आपराधिक इतिहास बेहद डरावना रहा है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ अब तक कुल 6 हत्याओं के मामले संज्ञान में आ चुके हैं. दिल्ली में हालिया ट्रिपल मर्डर केस में तीन लोगों की जान गई. इसके अलावा वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में जहरीले लड्डू खाने से दो लोगों की मौत हुई थी, जिन दोनों मामलों में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और कमरुद्दीन गिरफ्तार होकर जेल भी गया था. वहीं, राजस्थान के धौलपुर में भी एक व्यक्ति की मौत के मामले में उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था. इस तरह दिल्ली, यूपी और राजस्थान में फैले छह हत्याकांड कमरुद्दीन के नाम से जुड़े हुए हैं, जिसने उसे पुलिस रिकॉर्ड में एक आदतन और खतरनाक अपराधी के रूप में चिन्हित कर दिया है.
तांत्रिक की सोची समझी साजिश
पुलिस के मुताबिक यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी. यह पूरी तरह से सोची-समझी साजिश थी. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि करीब दो महीने पहले जहांगीरपुरी निवासी सलीम के जरिए लक्ष्मी की उससे पहचान हुई थी. बाद में लक्ष्मी ने शिव नरेश और रंधीर से उसकी मुलाकात कराई. कमरुद्दीन ने पहले विश्वास जीता, फिर लालच दिया, फिर जहरीले लड्डू खिलाकर हत्या की. बेहोश होने के बाद उसने 2 लाख रुपये लेकर फरार हो गया. अगर परिवार आत्महत्या की थ्योरी को खारिज न करता तो शायद यह मामला रहस्य ही बना रहता.
रणधीर 200 करोड़ की संपत्ति का मालिक, हर महीने 20 लाख तक आता था किराया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पीरागढ़ी में जिन तीन लोगों की हत्या हुई, उनमें एक रणधीर करोड़ों की संपत्ति का मालिक है. रणधीर दिल्ली के बापरोला गांव का रहने वाला था, वो करीब 200 करोड़ की संपत्ति का मालिक बताया जा रहा है. उसके पास 18 से 20 लाख महीने का किराया आता है, फिर भी वो धनवर्षा के चक्कर में 2 लाख रुपए लेकर बाबा के पास गया. बाबा हत्या करने के बाद 2 लाख रुपए लेकर भाग गया था.
फिरोजाबाद का है रहने वाला
तांत्रिक कमरुद्दीन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद का रहने वाला है. मक्खनपुर के आसफ अली रोड स्थित अजमेरी गेट निवासी नसीरुद्दीन का वह बेटा है. वह गाजियाबाद के लोनी और फिरोजाबाद में तंत्र-मंत्र का सेंटर चलाता है.
पुलिस टीम जिसने सुलझाई गुत्थी
ट्रिपल मर्डर केस की जाँच की अगुवाई करने वाले जिला पुलिस के डीसीपी सचिन शर्मा ने पश्चिम विहार ईस्ट थाने के SHO राधे श्याम और इंस्पेक्टर इन्वेस्टीगेशन राजपाल मीणा की मदद के लिए ACP पश्चिम विहार, पाटिल स्वागत राजकुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर स्पेशल स्टाफ रोहित कुमार, नारकोटिक्स इंस्पेक्टर रितेश राज और एंटी स्नेचिंग सेल के इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रणव को उनकी टीम के साथ लगाया गया था. जिसने रात दिन एक करके तकनीकी ढंग से जांच की और केस का खुलासा किया.
तंत्र-मंत्र के नाम पर किसी को भी अंधा विश्वास न करें
डीसीपी सचिन शर्मा के मुताबिक, पश्चिम विहार ईस्ट पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं में केस दर्ज करने के बाद आगे की जांच जारी है. पुलिस अब यह भी जांच रही है कि इससे पहले वह धनवर्षा के नाम पर कितने लाेगाें काे अपना शिकार बना चुका है? यह कहानी एक बड़ा सबक दे गई. लालच, अंधविश्वास और झूठे चमत्कार अक्सर जानलेवा साबित होते हैं. पीरागढ़ी कांड एक चेतावनी है — तंत्र-मंत्र के नाम पर किसी को भी अंधा विश्वास न करें। पुलिस ने आरोपी को न्याय के कटघरे में खड़ा कर दिया है, लेकिन ऐसे कई बाबा अभी भी समाज में सक्रिय हैं। सतर्क रहें, तथ्यों पर भरोसा करें, न कि जादू-टोने पर।



