
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। बांग्लादेश भारत का बिगड़ैल पड़ोसी है। चीन और पाकिस्तान की गोद में बैठे बांग्लादेश का दिमाग ठिकाने लगाने के लिए भारत ने कमर कस ली है। जिस चिकननेक को लेकर बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस भारत को धमका रहे थे, अब उसी चिकननेक तक भारत अंडरग्राउंड रेल दौड़ाने जा रहा है।
चिकननेक कॉरिडोर को सुरक्षित बनाने का प्लान
जानकारी के अनुसार, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि बंगाल से नॉर्थईस्ट तक रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को सुरक्षित करने की भारत की योजना में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरे लगभग 40 किलोमीटर के हिस्से में अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाना शामिल है।
कहां से कहां तक दौड़ेगी अंडरग्राउंड रेल
वैष्णव ने कहा कि बजट में इस क्षेत्र और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेलवे लिंक को चार ट्रैक तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे एक लंबे समय से महसूस की जा रही जरूरत पूरी होगी। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन श्रीवास्तव ने कहा कि अंडरग्राउंड हिस्सा बंगाल के अंदर टिन माइल हाट से रंगपानी स्टेशनों तक बनेगा।
रेल ट्रैक को इसलिए अंडरग्राउंड बनाया जाएगा
ट्रैक को अंडरग्राउंड करने का फैसला चिकन नेक को निशाना बनाने के खुले और छिपे खतरों के कारण लिया गया है, जो सबसे संकरे बिंदु पर मुश्किल से 25 किलोमीटर चौड़ा है।
ग्रेटर बांग्लादेश की खतरनाक साजिश
भारत की कमजोरी माने जा रहे इस कॉरिडोर को लेकर चिंताएं बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद बढ़ गईं, जब कुछ ग्रुप्स ने नॉर्थईस्ट को अलग-थलग करने के लिए ‘चिकन की गर्दन दबाने’ की बात कही। कुछ विरोधी लोगों ने इस इलाके को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के अपने विजन का हिस्सा बताया है।
बांग्लादेश ने चीन से ड्रोन फैक्ट्री लगाने का किया करार
ढाका का चीन की तरफ झुकाव भी एक और खतरे की घंटी है। हाल ही में बांग्लादेश की वायुसेना ने चीन की मदद से अपने यहां एक ड्रोन फैक्ट्री लगाने का करार किया है। इस सैन्य ड्रोन में चीन के खुफिया ड्रोन होने की बात भी कही जा रही है, जिससे भारत-बांग्लादेश के बीच चार हजार से अधिक की सीमाओं की निगरानी की जा सकेगी। इससे भारत में घुसपैठ का खतरा बढ़ सकता है।
कोई भी रुकावट से नॉर्थ-ईस्ट अलग-थलग
2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान मिलिट्री प्लानर्स ने कॉरिडोर के सिलीगुड़ी हिस्से की कमज़ोरी के बारे में बात की थी। यहां कोई भी रुकावट नॉर्थईस्ट को अलग-थलग कर सकती है, सप्लाई लाइन्स काट सकती है और सैनिकों की आवाजाही में रुकावट डाल सकती है। एक अधिकारी ने कहा-पटरियों को जमीन के नीचे ले जाना संकट के समय में भी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
चिकननेक को क्यों कहा जाता है भारत की कमजोर नस
चिकन नेक को सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है। यह पश्चिम बंगाल में बेहद रणनीतिक 20-22 किमी संकरी पट्टी यानी जमीन है, जो 8 उत्तर-पूर्वी राज्यों को बाकी भारत से जोड़ती है। यह कॉरिडोर नेपाल, बांग्लादेश और भूटान से घिरा है। इसे अकसर भारत की कमजोर नस कहा जाता है। यह चीन की चुंबी घाटी से महज 130 किमी दूर है।



