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चंडीगढ़ में खिला कमल, नगर निगम चुनाव में बीजेपी का क्लीन स्वीप, AAP-कांग्रेस में फूट का मिला फायदा

संवाददाता

चंडीगढ़ । चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों में बीजेपी को एकतरफा जीत मिली है. बीजेपी ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर कब्जा करके क्लीन स्वीप किया है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में टूट का फायदा सीधा बीजेपी को मिला है. नए बने मेयर सौरभ जोशी को 18 वोट मिले. वहीं आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 11 और कांग्रेस को सात वोट मिले, जिसमें एक वोट सांसद का भी है.

हर बार समझौता कांग्रेस ही क्यों करे?

कांग्रेस ने कहा, कभी केजरीवाल गोवा में चुनाव के लिए चले जाते हैं, कभी गुजरात जाकर लड़ते हैं लेकिन खुद जीतते नहीं. बीजेपी को रोकने के नाम पर हर बार समझौता कांग्रेस ही क्यों करे. अगर बीजेपी को रोकना है तो आम आदमी पार्टी वाले भी हमारे पक्ष में वोट कर सकते हैं. आज चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हमारा साथ देना चाहिए.

बीजेपी अपने षड्यंत्र में कामयाब हुई

उन्होंने कहा कि आज पार्टी ने ये सम्मान दिया है. अगले साल चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षदों के चुनाव होने हैं. लिहाजा इस साल अपने काम के एजेंडे और परफॉर्मेंस को जनता के बीच में लेकर जाएंगे. आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ प्रभारी जरनैल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में मेयर इलेक्शन हुए और बीजेपी एक बार फिर से अपने षड्यंत्र में कामयाब हुई है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सपोर्ट लेकर बीजेपी अपना मेयर बनाने में कामयाब रही. इससे पहले भी हमने देखा है कि बीजेपी को सत्ता का किस कदर लालच है. ये लोग कहते तो एक-दूसरे को विरोधी हैं लेकिन जब बात सत्ता की होती है तो कांग्रेस और बीजेपी एक हो जाते हैं. कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे का साथ लेने में भी हिचकिचाहट नहीं रखते.

बीजेपी ने सरेआम कांग्रेस का साथ लिया

उन्होंने कहा कि इससे पहले हमने पूरे देश में कई ऐसे मॉडल देखे हैं जहां इन दोनों की मिली-भगत दिखी है. महाराष्ट्र की अंबरनाथ कॉरपोरेशन में भी अपने अलाइंस शिवसेना को हराने के लिए बीजेपी ने सरेआम कांग्रेस का साथ लिया. चंडीगढ़ नगर निगम में हमने आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनाया था 2021 के चुनाव में लेकिन बीजेपी ने षड्यंत्र करके जनता के मैंडेट का अपमान किया.

जरनैल सिंह ने कहा, हमारे पार्षदों को तोड़ा. जबकि कांग्रेस बार-बार जो धोखा कर रही है कि जब भी बीजेपी को सपोर्ट की जरूरत हो तो कांग्रेस खुलकर सामने है और ये सब कुछ आज चंडीगढ़ की जनता के सामने है अब उन्हें तय करना है. बता दें कि चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षदों का 5 साल का कार्यकाल इस साल के अंत में खत्म हो रहा है.

इस साल के अंत में नए पार्षदों के चुनाव के लिए निगम चुनाव होने हैं जबकि पंजाब विधानसभा चुनाव भी सिर पर है. इसी वजह से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ये नहीं चाहते थे कि चंडीगढ़ की नगर निगम की कुर्सी हासिल करके ये संदेश जाए की हर बार बीजेपी को रोकने के नाम पर दोनों पार्टियां अपनी विचारधारा अलग होने के बावजूद सिर्फ सत्ता के लिए एकजुट हो जाती है. इसी वजह से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने एक साथ मिलकर ये मेयर चुनाव नहीं लड़ा.

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