
संवाददाता
गाजियाबाद । इंदौर में कथित तौर पर गंदे पानी से लोगों की मौत के बाद अब गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है. स्वास्थ्य विभाग की तरफ से वॉटर टेस्टिंग को तीन गुना तक बढ़ा दिया गया है. साल 2025 में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 2003 पानी के सैंपल कलेक्ट किए गए, जिनमें से केवल 1464 ही सही पाए गए, जबकि बाकि जांच में फेल हो गए. जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नोटिस जारी किया जाता है और संबंधित नगर निकाय और डेवलपमेंट अथॉरिटी को इस संबंध में अवगत कराया जाता है.
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में स्वास्थ्य विभाग ने पानी के कुल 1045 सैंपल लिए, जिसमें से 302 सैंपल जांच में फेल हो गए थे. वहीं 2023 में वॉटर टेस्टिंग को बढ़ाया गया. इस दौरान 1656 पानी के सैंपल दिए गए, जिसमें से 345 सैंपल जांच में फेल हुए. इसके बाद 2024 में स्वास्थ्य विभाग ने 2093 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे, जिसमें से 523 सैंपल फेल मिले. आंकड़ों की माने तो औसतन 25 से 29 प्रतिशत पानी के सैंपल जांच में फेल हुए.
बढ़ाया जाएगा जांच का दायरा
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, साल भर में औसतन पानी के दो हजार सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं. लेकिन, साल 2026 में जांच के दायरे को बढ़ाया गया है. 2026 में कुल 6000 सैंपल लिए जाएंगे. वहीं इस काम के लिए लगाई गई टीम की संख्या 3 से बढ़ाकर 13 कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न इलाकों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्टोरेज टैंक, टैप वॉटर और लोगों के घरों में रखे पानी के सैंपल लिए जाते हैं.
गाजियाबाद में पानी की जांच की स्थिति
2022
- कुल सैंपल: 1045
- जांच में फेल: 302
2023
- कुल सैंपल: 1656
- जांच में फेल: 345
2024
- कुल सैंपल: 2093
- जांच में फेल: 523
2025
- कुल सैंपल: 2003
- जांच में फेल: 539
विशेष रणनीति तैयार
गाजियाबाद की डिप्टी सीएमओ डॉ. राकेश कुमार गुप्ता के मुताबिक, “स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार विभिन्न क्षेत्रों से पानी के सैंपल लिए जाते हैं. साल भर अभियान चलाया जाता है और लैब में पानी के सैंपल की जांच की जाती है. पानी का सैंपल जांच में फेल होने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित को नोटिस जारी कर व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाते हैं. 2026 में वॉटर टेस्टिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है. इस साल जिले के 6000 पानी के नमूने लेकर जांच करने का लक्ष्य रखा गया है. वॉटर टेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, स्वास्थ्य विभाग ने कुल 13 टीमों की तैनाती की है.
बढ़ जाता है खतरा
वहीं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीपी त्यागी के मुताबिक, “लंबे समय तक दूषित पानी का पेयजल के रूप में प्रयोग करने से स्वास्थ्य संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे पानी का सेवन करने से लीवर संबंधित बीमारियां हो सकती हैं और आंतों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. अगर पानी की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार का संदेह है तो पानी उबालकर ही पिएं. अगर लंबे समय तक किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधित समस्या आ रही है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें.
जिले में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नगर आयुक्त और जलकल विभाग के प्रभारी अधिकारी से बातचीत की गई है. सभी वार्डों में पानी की जांच कराई जाएगी. हमारा प्रयास है कि गाजियाबाद के किसी भी निवासी को स्वच्छ पेयजल से वंचित न रहना पड़े.” – रविंद्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी (गाजियाबाद)
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के सभी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन को पत्र लिखा गया है. पत्र के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं जो इस प्रकार हैं-
- शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम में मानक अनुसार क्लोरीन डोजिंग सिस्टम पूर्ण रूप से क्रियाशील होना चाहिए.
- सभी स्टोरेज टैंक को पूर्ण रूप से क्लोरिनेशन द्वारा विसंक्रमित करते हुए टैंक को खाली किया जाए, जिसके बाद ही टैंक में फिर से जल इकट्ठा किया जाए ताकि ताकि संक्रमण की संभावना से बचा जा सके.
- जल संरक्षण के लिए टैंकरों की नियमित सफाई की जाए और टैंकरों में इकट्ठा होने वाली गाद के निस्तारण के लिए मानक अनुसार सभी आवश्यक उपाय किए जाएं.
- वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम और सीवेज सिस्टम के लिए किसी अनुभवी व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाए. वॉटर मैनेजमेंट और सीवेज सिस्टम की क्रियाशीलता की नियमित रूप से समीक्षा की जाए.
- शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम स्थापित किया जाए, जिससे किसी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत निस्तारण किया जा सके.
- मेंटेनेंस डिपार्टमेंट की तरफ से वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम और सीवेज सिस्टम का रखरखाव सही रूप से किया जाए.
- वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम और सीवेज सिस्टम के रखरखाव संबंधित रिकॉर्ड संरक्षित किए जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर निगरानी की जा सके.



