
संवाददाता
बंगलुरु। कर्नाटक में राज्य सरकार द्वारा कराए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि राज्य के अधिकांश मतदाता भारत में होने वाले चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष मानते हैं, वहीं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भी जनता का भरोसा मजबूत है। इस अध्ययन के मुताबिक बड़ी संख्या में नागरिकों का मानना है कि EVM सटीक और विश्वसनीय नतीजे देती हैं।
KMEA सर्वे: EVM की विश्वसनीयता पर मुहर
यह अध्ययन कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) द्वारा ‘लोकसभा चुनाव 2024: नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार (KAP) का एंडलाइन सर्वे’ शीर्षक से किया गया। सर्वे अगस्त 2025 में पूरा हुआ था, हालाँकि इसके नतीजे हाल ही में सार्वजनिक किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, 83.61% उत्तरदाताओं ने EVM को भरोसेमंद बताया, जबकि कुल 69.39% लोगों ने माना कि EVM सटीक परिणाम देती हैं, वहीं 14.22% ने इस बात से पूरी तरह सहमति जताई। यह सर्वे राज्य के चार प्रमुख प्रशासनिक संभागों, बेंगलुरु, मैसूरु, कलबुर्गी और बेलगावी की 102 विधानसभा क्षेत्रों में 5100 नागरिकों के बीच किया गया।
क्षेत्रवार आँकड़े और सियासी प्रतिक्रिया
क्षेत्रवार आँकड़ों पर नजर डालें तो कलबुर्गी में 83.24%, मैसूरु में 70.67%, बेलगावी में 63.90% और बेंगलुरु में 63.67% उत्तरदाताओं ने EVM को सटीक बताया। इन नतीजों के सामने आने के बाद कर्नाटक बीजेपी ने कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने इसे कॉन्ग्रेस द्वारा वर्षों से चलाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के कथित अभियान पर ‘करारा तमाचा’ बताया है।
बीजेपी कर्नाटक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जो राहुल गाँधी की हर बात पर सिर हिलाते हैं और प्रियंक खड़गे, जो जनमत की अनदेखी कर आत्मप्रचार में लगे रहते हैं, उन्हें जनता ने उनके ही गृह जिले कलबुर्गी में सबक सिखा दिया है।”
कुल मिलाकर यह अध्ययन न केवल चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे को दर्शाता है, बल्कि EVM को लेकर उठते सवालों पर भी एक मजबूत जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।



