
संवाददाता
नई दिल्ली। जैसे-जैसे 2025 का कैलेंडर अपने अंतिम पन्नों की ओर बढ़ रहा है, दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी एक बार फिर अपनी बेबसी पर आंसू बहा रही है. मानसून की बारिश ने कुछ समय के लिए उम्मीद जगाई थी, लेकिन साल खत्म होते-होते यमुना फिर से उन्हीं काले नालों और जहरीले झाग की गिरफ्त में है. करोड़ों खर्च हुए, सत्ता बदल गई, लेकिन नदी की नियति नहीं बदली.
DPCC और CPCB की 2025 की ताजा रिपोर्ट्स ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है. आंकड़ों के मुताबिक, यमुना अब केवल पानी का बहाव नहीं, बल्कि कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गई है.
ये है स्थिति
* शून्य ऑक्सीजन (DO): आईटीओ और आईएसबीटी जैसे इलाकों में ऑक्सीजन लेवल ‘जीरो’ दर्ज किया गया है. इसका मतलब है कि यहां जलीय जीवन पूरी तरह खत्म हो चुका है.
* प्रदूषण का मीटर: नालों में BOD का स्तर 220 mg/l तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित मानक (30 mg/l) से 7 गुना ज्यादा है.
* सीवेज का बोझ: दिल्ली रोजाना 350 करोड़ लीटर सीवेज पैदा करती है, जिसका बड़ा हिस्सा बिना साफ हुए सीधे नदी में गिर रहा है.

2025 में दिल्ली की सत्ता भाजपा के हाथों में आई. नई सरकार ने यमुना सफाई को ‘मिशन मोड’ पर लेने का दावा किया है. मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि दशकों की गंदगी साफ करने में उनकी सरकार को कम से कम 3 साल का समय लगेगा.
सरकार का नया एक्शन प्लान:
* यमुना में फेरी बोट चलाने की योजना.
* अत्याधुनिक मशीनों से सफाई का काम शुरू.
* साबरमती की तर्ज पर ‘यमुना रिवर फ्रंट’ का निर्माण.
CPCB बोर्ड मेंबर डॉ. अनिल कुमार गुप्ता के अनुसार, केवल नदी की सतह से कचरा हटाना समाधान नहीं है. जब तक हर एक नाले का पानी 100% ट्रीट होकर नदी में नहीं गिरेगा, तब तक यमुना का इकोसिस्टम वापस नहीं लौटेगा. इसके लिए तकनीकी सुधार और जन-भागीदारी दोनों अनिवार्य हैं.
DPCC की जुलाई 2025 की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में यमुना में कुल 27 प्रमुख नाले गिरते हैं. इनमें से 22 नालों में नियमित प्रवाह पाया गया, जबकि चार नालों में फ्लो नहीं था. मोलरबंद नाले को टैप किया जा चुका है, हालांकि टैपिंग के बावजूद बाकी नालों से आ रहा प्रदूषित व गंदा पानी नदी की हालत को लगातार बिगाड़ रहा है.



