
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है. इन 10 राज्यसभा सांसदों में बीजेपी के 8, सपा और बसपा के एक-एक सदस्य हैं. 2026 में रिटायर होने वाले राज्यसभा सांसदों में बीजेपी से बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा उर्फ गीता, हरदीप सिंह पुरी, दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का नाम शामिल हैं. सपा से प्रोफेसर रामगोपाल यादव हैं तो बसपा से रामजी गौतम हैं. रामजी गौतम के बाद बसपा शून्य सांसदों की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही है. करीब 36 साल में पहली बार होगा कि जब संसद के किसी सदन में बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा.
करीब दो दशकों तक कांग्रेस-भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के बीच एक मजबूत ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उभरने वाली बहुजन समाज पार्टी आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है. दलित अस्मिता और उत्तर प्रदेश की राजनीति के सहारे राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली बीएसपी 2024 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी. अब हालात ऐसे हैं कि पार्टी पहली बार संसद से पूरी तरह बाहर होने की कगार पर पहुंच गई है. बीएसपी के इकलौते बचे सांसद, राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो जाएगा. इसके बाद पार्टी की संसद में मौजूदगी पूरी तरह खत्म हो जाएगी.
बहुजन समाज पार्टी 2007 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली पार्टी थी. उसके बाद लगातार बहुजन समाज पार्टी का ग्राफ गिरता हुआ जा रहा है न सिर्फ वोट फीसद में बल्कि संसद और विधानसभा में भी बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व लगातार कम हुआ है. उत्तर प्रदेश की विधानसभा में जहां बहुजन समाज पार्टी का एक सदस्य है. वहीं बिहार की विधानसभा में भी एक ही सदस्य बहुजन समाज पार्टी का मौजूदा समय में है. ऐसे में समाज पार्टी के लिए यह सबसे इम्तिहान का दौर चल रहा है.
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भी है. बहुजन समाज पार्टी लगातार कोशिश कर रही है कि वह अपने सम्मान को बचाए रखे. एक तरफ जहां नए चेहरों को बहुजन समाज पार्टी ने मौका दिया है. वहीं उम्मीद जाहिर की जा रही है कि जिस तरह से संसद में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी किसी भी सदन में कोई भी सदस्य उसका प्रतिनिधित्व नहीं करेगा. माना जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी इससे सीख लेते हुए कोई ना कोई सकारात्मक रास्ता अपने लिए निकाल लेगी.



