नरेन्द्र भल्ला
पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और हमारे चीफ ऑफ डिफेंस समेत तीनों सेनाध्यक्षों ने पाकिस्तान के पाले-पोसे आतंकवाद को लेकर जो बयान दिये हैं, वे साफ इशारा दे रहे हैं कि “आपरेशन सिंदूर” 2.0 की पूरी तैयारी है। इसका माकूल वक़्त तो सरकार के मुखिया और सैन्य प्रमुख ही मिलकर तय करते हैं। लेकिन रायसीना हिल्स के सियासी गलियारों से जो खबरें छनकर आ रही हैं, उससे दो संकेत मिल रहे हैं।
पहला कयास यह कि हमारी दिवाली की रात पाकिस्तान के आसमां में कहर बरसाने वाली हो सकती है। दूसरा,इशारा यह मिल रहा है कि बिहार में वोटिंग से ऐन पहले इस ऑपरेशन को अंजाम देकर सारे सियासी समीकरण को बदलने की तैयारी है। हो सकता है कि इनमें से कोई एक कयास सही हो जाये और ये भी संभव है कि दोनों ही कयास फैल हो जायें। वह इसलिये कि पीएम मोदी की अब तक की कार्य-शैली देश को चौंकाने वाली ही रही है।

हालांकि,ये कयास लगाने वाले दोनों मौके बेशक ही फ्लॉप हो जायें लेकिन सूत्रों का दावा है कि नवंबर में ऑपेरशन सिंदूर 2.0 इस लक्ष्य के साथ पूरा होगा कि पाक अधिकृत कश्मीर पीओके पर भारत का कब्ज़ा होगा। इसकी बड़ी वजह भी है।
दरअसल,ऑपेरशन सिंदूर को दोबारा दोहराने की जल्दी इसलिये भी है कि इस साल मई में हुई हमारी सर्जिकल स्ट्राइक्स से हिल चुके पाकिस्तान के आतंकी संगठन अब अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हो चुके जैश-ए-मोहम्मद अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव ला रहा है। इस आतंकी संगठन ने ‘जमात-उल-मोमिनात’ नाम से अपनी पहली महिला ब्रिगेबनाने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला जैश के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर के नाम से जारी एक चिट्ठी के जरिए सार्वजनिक किया गया है।
इस नई ब्रिगेड के लिए भर्ती 8 अक्टूबर को पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित मरकज उस्मान-ओ-अली में शुरू भी हो गई है। इसमें सबसे खास बात यह है कि इस महिला आतंकियों की ब्रिगेड की जिम्मेदारी खुद मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर को मिली है।
बता दें कि इस महिला ब्रिगेड की कमान उसी सादिया अजहर को मिली है,जिसकाआतंकी पति यूसुफ अजहर 7 मई को भारतीय सेना के चलाए ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों की मानें,तो जैश ने अपने कमांडरों की पत्नियों के साथ-साथ बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मनसेहरा में अपने केंद्रों में पढ़ने वाली आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को भी इस ब्रिगेड में शामिल करना शुरू कर दिया है।
लेकिन एक न्यूज चैनल ने इस बारे में थोड़ी चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार ‘जमात अल-मोमिनात’ जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए एक्टिव हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप ग्रुप्स और कुछ मदरसों के नेटवर्क के जरिए इस ग्रुप की गतिविधियां फैल रही हैं। इसका मकसद महिलाओं को मज़हब के नाम पर बरगलाना और संगठन के लिए उन्हें इस्तेमाल करना है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक जैश के इस नए सर्कुलर (लेटर) में मक्का और मदीना की तस्वीरें लगाई गई हैं ताकि इसे धार्मिक रंग दिया जा सके।
गौरतलब है कि ISIS, बोको हराम, हमास और लिट्टे जैसे आतंकवादी समूहों का महिलाओं को आत्मघाती हमलावरों के रूप में तैनात करने का इतिहास रहा है। लेकिन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों ने काफी हद तक ऐसा करने से अब तक परहेज ही किया है। लेकिन जैश का यह नया कदम भविष्य के आतंकी अभियानों के लिए महिला आत्मघाती हमलावरों को ट्रेनिंग देने और उनका उपयोग करने के इरादे का संकेत देता है।



