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कौन हैं होटल की नौकरी छोड़कर सियासत में आने वाले महाराष्ट्र के दूसरे ‘अन्ना’, जो मराठा आंदोलन को कर रहे अगुवाई

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के सभी राजनीति दलों ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने पर सहमति व्यक्त की है। साथ ही मराठा प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वो अपना आंदोलन खत्म कर दें। लेकिन महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे का हल अभी भी निकलता नहीं दिख रहा है। सर्वदलीय बैठक के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी भूख हड़ताल खत्म नहीं की है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के और समय देने की मांग पर जरांगे ने दो टूक चेतावनी दी है और कहा है कि लगता है इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। मराठा आंदोनल को लीड कर रहे मनोज जरांगे को महाराष्ट का दूसरा अन्ना हजारे भी कहा जा रहा है। आइए जानते हैं कौन हैं मनोज जारंगे जो इतने बड़े आंदोलन का इतना बड़ा चेहरा बन गए ?

कौन है मनोज जरांगे पाटिल

महाराष्ट्र के बीड के रहने वाले मनाज जरांगे का जन्म मोतारी गांव में हुआ था। उन्होंने 2010 में 12वीं पास की और उसके बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी। पढ़ाई छोड़कर वह मराठा आंदोलन से जुड़ गए। इसके साथ वो होटल में नौकरी करते थे। होटल में नौकरी करके थोड़ी आमदनी होती थी, लेकिन उसके बावजूद मराठा आंदोलन की चाहत ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया। कुछ समय बाद मनोज जरांगे ने कांग्रेस जॉइन की थी। लेकिन कुछ समय बाद वह कांग्रेस से अलग हो गए थे।

आंदोलन के लिए बेच दी अपनी जमीन

मनोज जरांगे के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी, 3 भाई और 4 बच्चे हैं। वो अपने परिवार जे ज्यादा अपनी मराठा आंदोलन की मुहिम को ज्यादा महत्व देते हैं। मनोज के पास महज 4 एकड़ पैतृक जमीन थी। आंदोलन के लिए उन्होंने उस 4 एकड़ में 2 एकड़ जमीन भी बेच दी है। मनोज ने मराठा आरक्षण आंदोलन के लिए अपना एक संगठन बना रखा है जिसका नाम ‘शिवबा’ है।

8 दिनों से भूख हड़ताल पर

मनोज जरांगे के अनशन का ये दूसरा पार्ट-2 है। पहली बार जब वो मराठा आरक्षण को लेकर अनशन पर बैठे, तो सरकार ने एक समिति बनाई थी। इस पर निर्णय लेने के लिए मनोज जरांगे को 24 अक्टूबर की डेडलाइन दी थी। सरकार के इस वादे के बाद जरांगे ने 14 सितंबर को भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। जब 24 अक्टूबर को मराठा आरक्षण का वादा नहीं पूरा हुआ तो, वो 25 अक्टूबर को दोबारा अनशन पर बैठ गए। वो 8 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

सरकार की जरांगे से अपील

सरकार ने जरांगे से अपील की है कि वो अपना आंदोलन खत्म कर दें। महाराष्ट्र में सभी राजनीतिक दलों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने पर सहमति व्यक्त की है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य के 32 दलों ने शिरकत की थी। सभी दलों ने मराठा प्रदर्शकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके साथ मराठा आरक्षण के पक्ष में अपनी सहमति दी।

जरांगे ने सरकार को दी चेतावनी

मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि को परिणाम भुगतना होगा। मराठा आरक्षण की पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सभी दलों के 32 नेताओं की बैठक में यह निर्णय लिया गकि मराठा नेता मनोज जारांगे पाटिल को मराठा समुदाय को स्थायी आरक्षण प्रदान करने और इसके लिए कानूनी मुद्दों को पूरा करने के लिए कुछ समय देना चाहिए। इस पर जरांगे ने कहा है कि लेकिन समय की आवश्यकता क्या है और कितनी? पहले यह समझाएं।

ये है जरांगे की मांग

मनोज जारांगे पाटिल की मांग है कि सभी मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाणपत्र यानी ओबीसी से आरक्षण दिया जाना चाहिए। सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह अन्य समुदायों के साथ अन्याय किए बिना मराठों को आरक्षण देंगे। मराठा आरक्षण से लेकर शिंदे सरकार का फोकस फिलहाल 2 चीजों पर है। पहला कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की समिति के माध्यम से काम जारी रखवाया जाए। दूसरा मराठवाड़ा के निज़ाम युग के रिकॉर्ड में उन मराठों को कुनबी का जाति प्रमाण पत्र दिया जाना चाहिए जो कुनबी पाए जाते हैं।

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