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छत्तरपुर के फार्म हाउस में चल रहा था अवैध कैसिनो, पासकोड बताने पर खुलता था कैसिनो का गेट

संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दक्षिणी दिल्ली के डेरा गांव, छतरपुर के फार्म-हाउस में चल रहे एक अवैध ‘कैसीनो’ का पर्दाफाश किया है। अवैध कैसिनो चलाने के आरोप में 5 मालिको और जुआ खेलने वाले 47 आरोपी डक्स गिरफ्तार किया है। मौके से लगभग 8.06 लाख नकद, कैसिनो टेबल, कैसिनो टोकन, अवैध शराब, फ्लेवर्ड हुक्का और म्यूजिक सिस्टम जब्त किया गया। अपराध शाखा ने जुआ अधिनियम और दिल्ली आबकारी अधिनियम का मामला दर्ज किया है।

डीसीपी अमित गोयल ने बताया अपराध शाखा की आई.एस.सी टीम के इंस्पेक्टर पवन को गुप्त सूचना मिली थि कि छतरपुर, दिल्ली में स्थित एक फार्म-हाउस में अवैध कैसीनो संचालित किया जा रहा है। जानकारी मिलने के बाद इस सम्बन्ध में गुप्त जानकारी एकत्र की गयी। अवैध कैसिनो का पर्दाफाश करने के लिए सहायक आयुक्त रमेश चंद्र लांबा की देखरेख में व निरीक्षक सतेंद्र मोहन, पवन और महिपाल के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया | जिसमे उप-निरीक्षक अमित, रविंद्र हुड्डा, विकास, महिला उप-निरीक्षक आशा, सिमरन, सहायक उप-निरीक्षक यतंदर मलिक, प्रधान सिपाही नवीन, नितेश, ललित, राजबीर और मनदीप शामिल थे |

सूचना के आधार पर टीम ने डेरा गांव, छतरपुर, दिल्ली में स्थित फार्म-हाउस पर छापा मारा। परिसर के अंदर, कैसीनो में कई जुआरी मौजूद थे व जुआ खेल रहे थे | छापे के दौरान पुलिस को देखकर जुआरीयों ने 8,06,500 रूपए की नकदी, ताश और टोकन टेबल पर ही छोड़ दी। जिसे पुलिस कब्जे में ले लिया गया। कैसीनो में हुक्का व शराब भी दी जा रही थी। आरोपी सतेंद्र की निशानदेही पर तलाशी ली गयी और बीयर के 4 कार्टून व विस्की की 7 बोतलें भी बरामद की गई। मिथुन तनेजा की तलाशी लेने पर 5 लाख व एक अन्य व्यक्ति के पास से 2.5 लाख बरामद किए गए। जांच के दौरान 5 कैसीनो मालिक सहित 47 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। जांच करने पर पता चला के इस कैसिनो के संचालक व मालिक अमित कुमार, सतेंद्र सहगल, साहिल गुजराल, तेजिंदर सिंह, और मिथुन तनेजा है सभी एनआईटी फरीदाबाद, हरियाणा के रहने वाले हैं।

पूछताछ के दौरान, आरोपी व्यक्तियों (आयोजकों) ने खुलासा किया कि अवैध कैसीनो एक किराए के फार्म-हाउस में चल रहा था। उन्होंने अपने परिचितों व ग्राहकों को फोन व व्हाट्सएप द्वारा फार्म-हाउस की लोकेशन साझा की थी। प्रवेश प्रतिबंधित था और दरवाजा केवल “गुरुजी” पासकोड बताने पर खोला जाता था । प्रत्येक टेबल पर 1 से 8 तक के अंक लिखे थे और प्रत्येक अंक पर एक सट्टेबाज़ बैठ सकता था जिससे कुल 8 सट्टेबाज़ ही एक बार में भाग ले सकते थे| खेलने के लिए या तो टोकन खरीदना पड़ता था या आयोजकों से उधार लेना पड़ता था | आयोजकों द्वारा 500 से ₹10,000 तक के टोकन का उपयोग किया जा रहा था | आयोजक प्रत्येक सट्टेबाज़ को “तीन पत्ती” वितरित करता था और फिर सट्टेबाजों को एक-एक करके अपने कार्ड दिखाने होते थे। जिसके पास तीन समान कार्ड की बड़ी संख्या होती, वह विजेता घोषित किया जाता था | टेबल पर खिलाड़ियों द्वारा रखे गए सभी टोकन विजेता की संपत्ति हो जाती थी। दिए गए स्थान से सट्टेबाज़ अगले दिन टोकन को नगदी में परिवर्तित करा सकते थे |

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