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गाजियाबाद-नोएडा में डेंगू बेकाबू, 755 केस मिले:4 दिन में तीन मौत; अस्पतालों की OPD फुल, डेन-2 स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता

संवाददाता

गाजियाबाद। यूपी के गाजियाबाद और नोएडा में डेंगू का डंक बेकाबू हो रहा है। इस सीजन में अब तक 755 केस आ चुके हैं। 4 दिन के भीतर दोनों जिलों में तीन लोगों की डेंगू से मौत हो चुकी है। गंभीर बात ये है कि डेंगू के लिहाज से डेन-2 स्ट्रेन थोड़ा घातक माना जाता है, उसके 17 केस नोएडा में सामने आ गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर रोज जिस एरिया में जा रही है, वहीं डेंगू का लार्वा मिल रहा है। इससे स्पष्ट है कि फॉगिंग के नाम पर सरकारी महकमे में बड़ा खेल कर रहे हैं।

सबसे पहले गाजियाबाद का आंकड़ा समझिए…

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गाजियाबाद में 12 सितंबर को डेंगू के 10 नए केस मिले। यहां अब तक कुल 432 केस सामने आ चुके हैं। हेल्थ टीमों ने 61 क्षेत्रों का भ्रमण किया। 7449 घरों के सर्वे में 141 घर ऐसे थे, जहां एडीज लार्वा मिला है। लगभग रोजाना की यही स्थिति है।

31 अगस्त को गाजियाबाद के एक युवा कारोबारी की डेंगू से मौत भी हो गई थी। दो दिन पहले एक और महिला की मौत हुई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद ये दावा किया कि महिला की मौत डेंगू नहीं, किसी अन्य बीमारी की वजह से हुई थी।

अब बात नोएडा की, यहां भी 323 केस

नोएडा में 12 सितंबर तक डेंगू के मरीजों की संख्या 323 पहुंच गई है। यहां 3 सितंबर को होम्योपैथी डॉ. 28 वर्षीय अक्षिता सिंह की मौत हो गई थी। पहले इनकी एलाइजा रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फिर रैपिड टेस्ट में डेंगू रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे 3 दिन पहले नोएडा के हर्ष गर्ग उर्फ गुल्लू की गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल में डेंगू से मौत हो गई थी।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटीज में भी डेंगू के केस लगातार मिल रहे हैं। करीब 15 सोसाइटी में 80 से ज्यादा केस निकल चुके हैं। अजनारा होम्स और पंचशील हाइनिश सोसाइटी में 20-20 केस डेंगू के हैं।

‘डेन-2 स्ट्रेन में होती है प्लेटलेट्स की ज्यादा कमी और शरीर पर बनते हैं लाल चकते’

नोएडा के जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर राजेश शर्मा ने बताया, डी-स्ट्रेन के मरीजों में प्लेटलेट्स की भारी कमी होती है। शरीर पर लाल चकते बनने शुरू हो जाते हैं और ब्लीडिंग भी होती है। यानी ये डेन-2 डेंगू मरीजों के लिए ज्यादा घातक साबित होता है।

उन्होंने बताया, डेंगू जांच के लिए एलाइजा रिपोर्ट अहम है। रैपिड कार्ड के जरिए जो टेस्ट हो रहे हैं, उनमें बिना लक्षण वाले मरीजों में भी डेंगू पाया जा रहा है। लेकिन एलाइजा रिपोर्ट में वही मरीज नेगेटिव आ रहे हैं। इसलिए हम उन्हीं मरीजों को डेंगू मान रहे हैं, जिनकी एलाइजा रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ रही है।

शासन और जनपद के आंकड़ों में भारी अंतर

यूपी सरकार ने 12 सितंबर को डेंगू मरीजों के आंकड़े जारी किए हैं। 7 सितंबर तक जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, गौतमबुद्धनगर में 403, गाजियाबाद में 319, कानपुर में 225, मेरठ में 175, लखनऊ में 151, मुरादाबाद में 137 मामले सामने आए थे। संभल और बुलंदशहर जिले में डेंगू का आउट ब्रेक आ रहा है। इसी साल 15 मई को स्वास्थ्य विभाग ने यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल लॉन्च किया है। इसी पोर्टल के जरिए डेंगू की मॉनिटरिंग हो रही है।

हालांकि सरकार ने 12 सितंबर को जो आंकड़े जारी किए हैं, वे स्थानीय जनपद स्तर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों से थोड़ा भिन्न हैं। उदाहरण के तौर पर उप्र शासन ने गौतमबुद्धनगर में 7 सितंबर तक डेंगू मरीजों की संख्या 403 बताई है, जबकि गौतमबुद्धनगर का स्वास्थ्य विभाग 12 सितंबर तक कुल संख्या ही 323 बता रहा है। इसी प्रकार गाजियाबाद के आंकड़ों में भी अंतर है।

स्वास्थ्य विभाग मेरठ मंडल के डिविजनल सर्विलांस ऑफिसर डॉ. अशोक तालियान ने बताया, डेन-2 स्ट्रेन से प्रभावित मरीजों को बुखार, जोड़ों का दर्द, आंखों के पास दर्द शुरू होने लगता है। शरीर पर लाल रंग के चकते बन जाते हैं। प्लेटलेट्स तेजी से घटती हैं। फिर इंटरनल ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। अगर इसी दौरान डेन-2 के मरीज को हैमरेजिक बुखार हो जाए तो ये और खतरनाक हो जाता है। । इसकी वजह से कई आर्गन पर असर पड़ता है।

मरीज को शॉक सिंड्रोम भी हो जाता है। इसकी वजह से नब्ज गिरने लगती है। मरीज को बेहोशी आ जाती है। अचानक से शरीर में तेज दर्द होता है। इसका असर नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है। ऐसे में मरीज की हालत बिगड़ने लगती है।

सीएमओ बोले- अस्पतालों में इंतजाम पूरे

गाजियाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉक्टर भवतोष शंखधर ने बताया, एमएमजी और संयुक्त जिला चिकित्सालय सहित सभी सीएचसी और पीएचसी में डेंगू वार्ड पहले से बने हुए हैं। अस्पतालों की ओपीडी में जितने भी बुखार पीड़ित आ रहे हैं, उनकी दो स्तर पर डेंगू जांच कराई जा रही है।

जांच में यदि डेंगू की पुष्टि हो जाती है तो संबंधित मरीज के घर पर टीम भेजकर फॉगिंग कराई जाती है और उसके सारे फैमिली मेंबर्स को जरूरत की मेडिसिन दी जाती हैं। फिलहाल गाजियाबाद में घबराने जैसी कोई बात नहीं है।

वहीं, गाजियाबाद के नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा, फॉगिंग के लिए मशीनें बढ़ाने का आदेश कर दिया गया है। प्रत्येक वार्ड, गली-मोहल्ले में फॉगिंग करने के लिए टीमों को कहा है। इसकी रोज मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

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